राजनांदगाँव : शासन के प्लेसमेंट कैम्प युवाओं के लिए महज़ छलावा – हिन्दू युवा मंच…

O पिछली भर्ती का हश्र क्या हुआ, जिम्मेदार अमले को झाँकने तक की फुर्सत नही.

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O महज़ कागज़ों में ही दिया जा रहा रोजगार, धरातल पर वास्तविक स्थिति कुछ और ही.

O जिला प्रशासन और रोजगार कार्यालय महज औपचारिकता निभा रहा.

राजनांदगाँव/ जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में रोजगार कार्यालय के द्वारा नियोक्ता कंपनियों के माध्यम से आयोजित प्लेसमेन्ट कैम्प की प्रासंगिकता पर संदेह जताते हुए, हिन्दू युवा मंच ने इसके माध्यम से होने वाली भर्तियों की प्रासंगिकता और सार्थकता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हुए समस्त पिछली भर्तियों की टोह लेने की माँग की है।

 हिन्दू युवा मंच के जिलाध्यक्ष किशोर माहेश्वरी और शहर अध्यक्ष सुरेश लोहमार ने जिला प्रशासन के प्लेसमेंट कैम्प की सार्थकता पर निशाना साधते हुए महज इसे नौटंकी बताया है। उन्होंने आगे कहा कि, जिले के बेरोजगार युवक और युवतियों को रोजगार दिलाने की मंशा से जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में रोजगार कार्यालयनके द्वारा और नियोक्ता कंपनियों के माध्यम से समय - समय पर प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन ब्लॉक और जिला मुख्यालय स्तर पर किया जाता है। पखवाड़े भर में ही ऐसे कई प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन किया जा चुका है। 

स्वाभविक है काफी सारे उम्मीदवारों का चयन भी हो चुका होगा और उनकी नियुक्ति भी यथास्थान पर हो चुकी होगी। स्वयँ कलेक्टर महोदय, जिला प्रशासन और रोजगार कार्यालय के आलाधिकारियों ने क्या कभी ये जानने की कोशिश की कि, प्लेसमेंट कैम्प के माध्यम से जिन उम्मीदवारों की भर्ती पिछले सत्र में की गई थी, उनमें से ऐसे कितने उम्मीदवार हैं, जिन्होंने जॉब छोड़ दी है या ऐसे कितने उम्मीदवार हैं जो वर्तमान समय में भी जॉब कर रहे हैं ? अगर वास्तविक आंकड़े मालूम चल जाएं तो आप दंग रह जाएंगे। उक्त भर्ती के पीछे भी कई छुपे हुए नियम और शर्ते होती है,
 
जो शासन और प्रशासन को पता भी नही होती। कितने कर्मचारियों को तो नियोक्ता कंपनी शर्ते और मापदंड पूरा न कर पाने की स्थिति में या जॉब पर रखती ही नही या कुछ ही दिनों में निकाल देती है। जिला प्रशासन भी प्लेसमेंट कैम्प आयोजित कर भूल जाता है और आगे पाठ, पीछे सपाट की तर्ज़ पर नई भर्तियों के आयोजन में लग जाती है। शासन के पास सिर्फ कागजों में दिखाने के लिए रह जाता है कि, उन्होंने कितने सारे बेरोजगार युवाओं जो रोजगार मुहैय्या कराया। शासन को मतलब भी नही कि, नियोक्ता कम्पनी ने किसे और क्यों निकाला। 

प्लेसमेंट कैम्प के माध्यम से भर्ती उम्मीदवारों पर अगर कोई अत्याचार या शोषण हो भी रहा हो तब भी प्रशासन अनभिज्ञ बनी रहती है और इस बात से कोई वास्ता भी नही रखती। वैसे भी शासन का काम बस इतना ही तो है कि, उसके पास कागजों में रोजगार देने और दिखाने तक का आंकड़ा मौजूद रहे। बाकि सब ऊपर वाला देख लेगा। कोई सरकारी अमला यह कभी नही पूछता कि, पिछली भर्तियों की परिणीति क्या हुई ? न ही इसकी कोई सुध लेने वाला है और न ही किसी को झाँकने तक की फुर्सत। शासन की यह प्लेसमेंट कैम्प योजना महज नौटंकी और दिखावा ही साबित हो रही है। 

ये जितने भी सरकारी कैम्प जिला प्रशासन के माध्यम से लगाए जाते हैं, बेरोजगारों को महज़ कागज़ों में ही रोजगार देने का काम चल रहा है। इसके नतीजों पर जाएं तो प्लेसमेंट कैम्प युवाओं के लिए महज़ औपचारिकता और छलावा साबित हो रही है। इसकी वास्तविकता जानने की अगर कोशिश की जाए तो, कागज के आंकड़ों और धरातल की स्थिति दोनों में ही धरती और आसमान का अंतर दिखाई पड़ेगा। हिन्दू युवा मंच ने ज्ञापन के माध्यम से प्लेसमेंट कैम्प की प्रासंगिकता और सार्थकता की छानबीन करने की माँग की है।

 हिन्दू युवा मंच के जिलाध्यक्ष किशोर माहेश्वरी और शहर अध्यक्ष सुरेश लोहमार ने जिला प्रशासन के प्लेसमेंट कैम्प की सार्थकता पर निशाना साधते हुए महज इसे नौटंकी बताया है। उन्होंने आगे कहा कि, जिले के बेरोजगार युवक और युवतियों को रोजगार दिलाने की मंशा से जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में रोजगार कार्यालयनके द्वारा और नियोक्ता कंपनियों के माध्यम से समय - समय पर प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन ब्लॉक और जिला मुख्यालय स्तर पर किया जाता है। पखवाड़े भर में ही ऐसे कई प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन किया जा चुका है। 

स्वाभविक है काफी सारे उम्मीदवारों का चयन भी हो चुका होगा और उनकी नियुक्ति भी यथास्थान पर हो चुकी होगी। स्वयँ कलेक्टर महोदय, जिला प्रशासन और रोजगार कार्यालय के आलाधिकारियों ने क्या कभी ये जानने की कोशिश की कि, प्लेसमेंट कैम्प के माध्यम से जिन उम्मीदवारों की भर्ती पिछले सत्र में की गई थी, उनमें से ऐसे कितने उम्मीदवार हैं, जिन्होंने जॉब छोड़ दी है या ऐसे कितने उम्मीदवार हैं जो वर्तमान समय में भी जॉब कर रहे हैं ? अगर वास्तविक आंकड़े मालूम चल जाएं तो आप दंग रह जाएंगे। उक्त भर्ती के पीछे भी कई छुपे हुए नियम और शर्ते होती है,

 जो शासन और प्रशासन को पता भी नही होती। कितने कर्मचारियों को तो नियोक्ता कंपनी शर्ते और मापदंड पूरा न कर पाने की स्थिति में या जॉब पर रखती ही नही या कुछ ही दिनों में निकाल देती है। जिला प्रशासन भी प्लेसमेंट कैम्प आयोजित कर भूल जाता है और आगे पाठ, पीछे सपाट की तर्ज़ पर नई भर्तियों के आयोजन में लग जाती है। शासन के पास सिर्फ कागजों में दिखाने के लिए रह जाता है कि, उन्होंने कितने सारे बेरोजगार युवाओं जो रोजगार मुहैय्या कराया। शासन को मतलब भी नही कि, नियोक्ता कम्पनी ने किसे और क्यों निकाला। प्लेसमेंट कैम्प के माध्यम से भर्ती उम्मीदवारों पर अगर कोई अत्याचार या शोषण हो भी रहा हो तब भी प्रशासन अनभिज्ञ बनी रहती है और इस बात से कोई वास्ता भी नही रखती। 

वैसे भी शासन का काम बस इतना ही तो है कि, उसके पास कागजों में रोजगार देने और दिखाने तक का आंकड़ा मौजूद रहे। बाकि सब ऊपर वाला देख लेगा। कोई सरकारी अमला यह कभी नही पूछता कि, पिछली भर्तियों की परिणीति क्या हुई ? न ही इसकी कोई सुध लेने वाला है और न ही किसी को झाँकने तक की फुर्सत। शासन की यह प्लेसमेंट कैम्प योजना महज नौटंकी और दिखावा ही साबित हो रही है। ये जितने भी सरकारी कैम्प जिला प्रशासन के माध्यम से लगाए जाते हैं, 

बेरोजगारों को महज़ कागज़ों में ही रोजगार देने का काम चल रहा है। इसके नतीजों पर जाएं तो प्लेसमेंट कैम्प युवाओं के लिए महज़ औपचारिकता और छलावा साबित हो रही है। इसकी वास्तविकता जानने की अगर कोशिश की जाए तो, कागज के आंकड़ों और धरातल की स्थिति दोनों में ही धरती और आसमान का अंतर दिखाई पड़ेगा। हिन्दू युवा मंच ने ज्ञापन के माध्यम से प्लेसमेंट कैम्प की प्रासंगिकता और सार्थकता की छानबीन करने की माँग की है।