राजनांदगांव: कलेक्टर ने पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों एवं पोल्ट्री फार्म व्यवसायियों की ली बैठक…

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राजनांदगांव- 15 जनवरी 2021। कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा ने आज बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएन्जा) के संक्रमण से सुरक्षा के संबंध में पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों एवं जिले के पोल्ट्री फार्म व्यवसायियों की बैठक ली। कलेक्टर श्री टोपेश्वर वर्मा ने कहा कि राजनांदगांव जिला महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश तथा राज्य के अन्य जिलों से लगा हुआ है, जहां बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। ऐसी स्थिति में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। इसके फैलाव को रोकना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने पोल्ट्री व्यवसायियों से कहा कि मुर्गियों में बर्ड फ्लू के लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सा विभाग को तत्काल सूचित करें। जिससे समय रहते सुरक्षित उपाय किए जा सके।

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उन्होंने पशु चिकित्सा विभाग द्वारा, पोल्ट्री फार्म के लिए जारी निर्देशों का पालन करने कहा। उन्होंने कहा कि शहरों तथा गांवों में मुर्गियों की बिक्री होती है। इन जगहों पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। मुर्गियों से निकलने वाले वेस्ट का उचित निराकरण करें। कलेक्टर श्री वर्मा ने पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को लगातार फिल्ड में रह कर निगरानी करने के निर्देश दिए हंै। उन्होंने कहा कि बर्ड फ्लू के लक्षण दिखने पर तत्काल सैम्पल लेकर जांच की कार्रवाई करें।

उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ. राजीव देवरस ने बताया कि बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए विशेष सावधानी रखी जाए। जहां इसका विक्रय किया जाता है, उन स्थानों पर साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंंने बताया कि बर्ड फ्लू संक्रमण की सुरक्षा के लिए जिला तथा विकासखंड स्तर एवं अंतर्राज्यीय सीमा के लिए रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है, जो लगातार सभी क्षेत्रों में मानिटरिंग कर रही है। उन्होंने कहा कि चिकन और अंडे को अच्छी तरह पका कर खाने में सुरक्षित है।

डॉ. फणेश्वर कुमार साहू ने बर्ड फ्लू संक्रमण के संबंध में जानकारियां दी। साथ ही इसकी रोकथाम संबंधी उपाय के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो कि इन्फ्लुएन्जा वायरस व विषाणु से होता है। यह पक्षियों तथा मनुष्य में होने वाली जिनेटिक बीमारी है। इसमें पक्षियों की मृत्यु दर अत्यधिक होती है। जिससे मनुष्यों में जुकाम एवं आंखों के कंजेक्टेवाइटिस के लक्षण दिखाई देते हैं। यह बीमारी मुर्गियां, टर्की, बटेर, गिनी, मुर्गा, वन्य पक्षी एवं मनुष्यों में होता है।  इस रोग का संचरण प्रवासी जलीय पक्षी, पक्षी से पक्षी, पक्षी से मनुष्य, वायु, मल-मूत्र, मक्खियों, निर्जीव स्रोत, जलीय पक्षी, जंगली बतख इसके वाहक माने जाते जाते है। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी, पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी एवं पोल्ट्री फार्म व्यवसायी उपस्थित थे।