राजनांदगांव : घुमका पशु चिकित्सालय में बीमार पशुओं के इलाज की व्यवस्था फेल…

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Publish Date: | Tue, 23 Feb 2021 07:44 AM (IST)

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घुमका पशु चिकित्सालय में बीमार पशुओं के इलाज की व्यवस्था फेल
घुमका। स्थानीय पशु चिकित्सालय में अव्यवस्था का आलम है, जिसके चलते पशुपालकों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पशु अस्पताल लंबे समय से डाक्टरों की कमी से जूझ रहा है।

घुमका। स्थानीय पशु चिकित्सालय में अव्यवस्था का आलम है, जिसके चलते पशुपालकों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पशु अस्पताल लंबे समय से डाक्टरों की कमी से जूझ रहा है। पर्याप्त संख्या में पशु चिकित्सक नहीं होने के कारण पशुपालकों के बीमार पशुओं का इलाज समय पर नहीं हो पा रहा है।

मजबूरन पशुपालक निजी वेटनरी में अपने बीमार पशुओं का इलाज करा रहे हैं। पशु पालक लंबे समय से स्थायी चिकित्सक की नियुक्ति करने की मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिसका खामियाजा क्षेत्र के पशुपालकों को भुगतना पड़ रहा है।

पशु चिकित्सालय समेत ब्लाक के पशु औषधालय में लंबे समय से दवाइयों की भी कमी बनी हुई है।

चिकित्सालय में स्टाफ की कमी

पशु चिकित्सालय के संचालन का ढर्रा बिगड़ गया है। इसकी मुख्य वजह डाक्टरों की कमी होना है। स्थिति यह है कि बीमार पशुओं को देखने के लिए लिए न तो कोई डाक्टर है और न ही इलाज के लिए जरुरी संसाधन।

बता दें घुमका के पशु चिकित्सालय में आसपास के करीब 40 गांवों के पशु पालक अपनी बीमार पशुओं के इलाज के लिए आते हैं। लेकिन चिकित्सालय में इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पशु पालकों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक ओर राज्य की कांग्रेस सरकारी नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी योजना चला रही है, वहीं दूसरी ओर पशु चिकित्सालय में इलाज की व्यवस्था ठप है।

स्थानीय पशुचिकित्सालय में फिलहाल स्वीकृत पदों के अनुसार कर्मचारियों की पदस्थापना नहीं की गई है। मिली जानकारी के अनुसार एक वेटनरी सर्जन, पशुचिकित्सा क्षेत्राधिकारी और पशुपरिचारक के दो-दो पदों और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की स्वीकृति है, लेकिन मात्र दो कर्मचारी ही पदस्थ हैं।

जबकि प्रभारी सर्जन स्नातकोत्तर अध्ययन के अवकाश में अंजोरा के लिए भारमुक्त कर दिया गया है।

जीवन रक्षक दवाइयों का टोटा

स्थाई वेटनरी सर्जन के अभाव में पशु चिकित्सालय के आश्रित मोहंदी, उपरवाह, भैंसातरा, भदेरा नवागांव, इराईकला समेत कई पशु औषधालयों की व्यवस्था भी पटरी से उतर गई है। पशुचिकित्सालय से लेकर तमाम औषधालयों में पशुओं के जीवन रक्षक दवाइयों की कमी बनी हुई है। जबकि शासन से स्वीकृत और निर्धारित दवाइयों की आपूर्ति लगातार की जा रही है। पशुऔषधालयों की ओपीडी रजिस्टर में विगत कई महीनों से गिनती के पशुपालकों के आमद दर्ज हैं।

पशु औषधालय इराईकला के एक क्षेत्र सहायक को पशुओं के उपचार की ओपीडी में दर्ज निर्धारित मानक लक्ष्‌यों से काफी कम गिनती के आंकड़ों को लेकर शोकाज नोटिस भी दिया गया था। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सर्जन को अध्ययन अवकाश स्वीकृत कर संबंधित संस्था के लिए भारमुक्त की कार्रवाई लिखते हुए अस्थायी तौर पर प्रभारी सर्जन की पदस्थापना का आदेश जारी हो चुका है। लेकिन वेटनरी सर्जन की स्थाई पदस्थापना नहीं होने के कारण लगभग 40 गांव के पशुपालकों के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है।

चिकित्सालय में किसी प्रकार की अव्वस्था नहीं है। सर्जन पढ़ाई के लिए गए हुए हैं। इनके स्थान पर सुकुलदैहान के चिकित्सक को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राजीव देवराज, उपसंचालक, पशु चिकित्सा विभाग

SOURCE : .naidunia.com