राजनांदगांव : छ.ग. अनाधिकृत विकास का नियमितिकरण (संशोधन) अधिनियम/नियम 2022 के प्रावधानों के क्रियान्वयन हेतु महापौर की अध्यक्षता में नगर निगम में कार्यशाला सम्पन्न…

राजनांदगांव 16 सितम्बर। शासन के निर्देश छ.ग. अनाधिकृत विकास नियमितिकरण (संशोधन) अधिनियम 2022 के अनुसार एवं कलेक्टर तथा अध्यक्ष जिला नियमितिकरण समिति के निर्देशानुसार छ.ग. अनाधिकृत विकास नियमितिकरण (संशोधन) अधिनियम/नियम 2022 के प्रावधानों के क्रियान्वयन हेतु आज प्रातः 11 बजे से निगम सभागृह में महापौर श्रीमती हेमा सुदेश देशमुख की अध्यक्षता में कार्यशाला आयोजित किया गया।

Advertisements

कार्यशाला में निगम अध्यक्ष श्री हरिनारायण पप्पू धकेता, नेताप्रतिपक्ष श्री किशुन यदु,उपायुक्त श्री सुदेश कुमार सिंह, कार्यपालन अभियंता श्री यू.के.रामटेके सहित महापौर परिषद के प्रभारी सदस्य सर्वश्री मधुकर वंजारी, संतोष पिल्ले, विनय झा, भागचंद साहू, गणेश पवार,जिला योजना समिति के सदस्य श्री सिद्धार्थ डोंगरे व श्री अमीन हुड्डा, पार्षद सर्वश्री शिव वर्मा, टोपेन्द्र सिंह पारस वर्मा, श्रीमती सुनिता फडनवीस,श्रीमती मधु बैद, महेश साहू, गगन आईच, अरूण देवांगन,नामांकत पार्षद सर्वश्री मामराज अग्रवाल,

एजाजूल रहमान, झम्मन देवांगन, प्रभात गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यशाला में उक्त अधिनियम/नियम की जानकारी श्री सूर्यभान ठाकुर उप संचालक नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा पी.पी.टी. के माध्यम से अवगत कराया गया।


कार्यशाला में उप संचालक श्री ठाकुर ने जानकारी देते हुये बताया कि छ.ग. अनाधिकृत विकास नियमितिकरण (संशोधन) अधिनियम/नियम 2022 के तहत अनाधिकृत भवनों का नियमितीकरण 14 जुलाई 2022 तक निर्मित भवनों का एक वर्ष तक की अवधि के लिये किया जायेगा, विशेष परिस्थितियों में इसके अतिरिक्त समय सीमा 30 दिवस सक्षम प्राधिकारी द्वारा बढ़ाया जा सकेगा।

उन्होेंने बताया कि अनाधिकृत विकास से अभिप्रेत है कि प्रदत्त अनुज्ञा के विपरित या प्रदत्त अनुज्ञा से परिवर्तित स्वरूप मंे या बिना अनुज्ञा के अथवा निर्धारित भूमि उपयोग से विचलित कर किया गया हो। प्राधिकारी किसी अनाधिकृत विकास के निम्न लिखित 5 विषयों का नियमितीकरण कर सकेगा। जिसमें पार्श्व खुला स्थान, तलक्षेत्र अनुपात, भूमि उपयोग में परिवर्तन, पार्किंग एवं पहुच मार्ग।


उप संचालक श्री ठाकुर ने बताया कि 0 से 120 वर्ग मीटर तक अनाधिकृत अवासीय भवनों का प्रस्तुत आवश्यक दस्तावेंजो के आधार पर निःशुल्क नियमितीकरण किया जावेंगा। अनाधिकृत विकास में निधारित प्रयोजन से भिन्न भूमि के उपयोग परिवर्तन करने पर उस क्षेत्र की भूमि के लिये वर्तमान में प्रचलित कलेक्टर गाईड लाईन दर का 5 प्रतिशत अतिरिक्त शास्ति देय होगा। अनाधिकृत विकास निर्धारित पार्किंग की कमी होने पर प्रत्यक कार स्थान की कमी के लिये 50 हजार रूपये शास्ति राशि आवेदक द्वारा देय होगा। ऐसी गैर लाभ अर्जन करने वाली
संस्थाये जो लाभ अर्जन के उद्देश्य से स्थापित न की गयी हो, के अनाधिकृत विकास के प्रत्येक प्रकरण में शास्ति प्राक्कलित राशि के 50 प्रतिशत की राशि दर से देय होगा।


उप संचालक श्री ठाकुर ने बताया कि अनाधिकृत विकास नियमितीकरण प्रकरण किसी कारणवश निरस्त किया जाता है, तो आवेदक संभागीय आयुक्त के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकेगा तथा अंतिम रूप से राज्य शासन को भी अपील कर सकता है। नगर निगम क्षेत्रांतर्गत के नियमितीकरण के प्रकरणों का ले आउट नगर निगम में पंजीकृत इंजीनियर से तैयार कराकर आवेदन के साथ प्रस्तुत करेगा।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग 300 वर्ग मीटर से अधिक आकर के भूखण्डों पर लागू होगा। उन्होंने बताया कि नियमितीकरण के लिये आवेदन के साथ भूमि स्वामित्व दस्तावेंज (अधतन बी-1, पी-2), खसरा बटांकन, बिजली बिल, सम्पत्तिकर, लेआउट, भवन अनुज्ञा, आर्किटेक्ट द्वारा वर्तमान में निर्मित भवन, मानचित्र का ले आउट, 5 प्रतियो में भवन के चारो तरफ का फोटोग्राफ भवन का स्थल मानचित्र प्रस्तुत करना होगा।


कार्यशाला के अंत में महापौर श्रीमती हेमा देशमुख ने छत्तीसगढ अनाधिकृत विकास का नियमितिकरण विधेयक 2022 लाने के लिये माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुये कहा कि प्रावधानों का क्रियान्वयन आम नागरिकों में प्रचार प्रसार कर प्राथमिकता देते हुये बिना किसी विलंब के प्रकरणों का निराकरण करेंगे, ताकि जनता को आसानी से शासन की योजना का लाभ मिल सके। उन्होेंने कार्यशाला में उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में नगर निगम के तकनीकि अधिकारी, इंजीनियर, वास्तुविद, कालोनाईजर, बिल्डर्स आदि उपस्थित थे।