राजनांदगांव : भाजपा नेताओं को न्यायालय में पेश होने मिला नोटिस…

राजनांदगांव – प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष एवं राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद मधुसूदन यादव और पूर्व सांसद अभिषेक सिंह की चिटफंड मामले में संलिप्तता जाहिर करते हुए राजनांदगांव पुलिस द्वारा उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत होने धारा 420 के तहत नोटिस भेजा गया है। जिसके बाद यहां की राजनीति गरमा गई है और भाजपा नेताओं ने पुलिस पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है।

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चिटफंड कंपनी के मामले में संलिप्तता जाहिर करते हुए राजनांदगांव के पूर्व सांसद मधुसूदन यादव और पूर्व सांसद अभिषेक सिंह को राजनांदगांव पुलिस ने अलग-अलग थानों से धारा 420 के तहत बीते 13 और 14 सितंबर को एक नोटिस जारी करते हुए इन्हें 16 सितंबर सुबह 11:00 बजे न्यायालय में पेश होने कहा है, जिसके बाद यहां की राजनीति गरमा गई है और भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर नोटिस भेजे जाने का विरोध करते हुए कहा है कि इस मामले में न्यायालय से स्टे मिला हुआ इसके बावजूद नोटिस जारी कर न्यायालय में पेश होने कहा जा रहे है जो गतल है।

धारा 420 के तहत मिले इस नोटिस के मामले को लेकर पूर्व सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष मधुसूदन यादव ने पुलिस को अपनी गिरफ्तारी के लिए चुनौती देते हुए कहा कि इस पूरे मामले में स्टे लगा हुआ है, इसके बावजूद धाराओं को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने पुलिस पर षड्यंत्र करने और सरकार के दबाव में नोटिस जारी किए जाने का आरोप लगाए हैं।

वही काग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता रुपेश दुबे का कहना है कि पुलिस किसी के दबाव मे काम कर रही है उन्होने बताया कि चिटफंड के मामले भाजपा कार्यकाल मे ज्यादा बढे वही काग्रेस ने उनके पैसे लौटाने की काम कर रही है

चिटफंड के मामले में राजनांदगांव जिला प्रदेश में प्रमुख स्थान रखता है। यहां लाखों की संख्या में निवेशकों ने अपने करोड़ों रुपए चिटफंड में लगाए हुए हैं। चिटफंड कंपनियों के खिलाफ शिकंजा कसने के दौरान इन कंपनियों के कार्यक्रमों में शामिल होने वाले नेताओं पर भी निवेशक और अभिकर्ताओं ने एफआईआर दर्ज करवा दिया था। जिसके बाद अंबिकापुर और राजनांदगांव में भी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुआ है, जिसमें राजनांदगांव के पूर्व सांसद मधुसूदन यादव और पूर्व सांसद अभिषेक सिंह के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज हुआ था।

इस एनएफआईआर के विरुद्ध प्रस्तुत याचिका में उच्च न्यायालय बिलासपुर ने इस मामले में जनप्रतिनिधियों और नेताओं के खिलाफ जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगाई है। वहीं इस नोटिस का जवाब देते हुए मधुसूदन यादव और अभिषेक सिंह के वकील ने कहा है कि मेरे पक्ष कार द्वारा एफआईआर के विरुद्ध प्रस्तुत याचिका में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा आदेश दिनांक 18 सितंबर 2019 एवं 23 सितंबर 2019 को मेरे पत्रकारों के विरुद्ध किसी तरह का जबरदस्ती कार्रवाई किए जाने पर रोक लगाई गई है। बहराल भाजपा नेताओं को पुलिस के द्वारा नोटिस जारी किए जाने से राजनीतिक घमासान मचता नजर आ रहा है। वहीं इस मामले में पुलिस कुछ भी कहने से बच रही है।