प्रतीकात्मक फोटो
स्वदेशी निमोनिया वैक्सीन अब भारत की लैब में भी तैयार की जाए क्योंकि औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने दवा बनाने के लिए भारत को पूर्ण रूप से अनुमति मिल चुकी है। वहीं, ट्रायल सफल होने के बाद यह दवा जल्दी ही मार्कीट में आ जाएगी। इसके लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) का अप्रूवल भी लिया जा चुका है।
भारत में पूर्ण रूप से तैयार निमोनिया की वैक्सीन को उत्पादन की अनुमति मिल गई है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को जानकारी दी है कि देश में निमोनिया का एक टीका विकसित किया गया है. खास बात है कि इस वैक्सीन का पूरा डेवलपमेंट हमारे देश में ही किया गया है.
मंत्रालय ने कहा कि पूरी तरह से देश में विकसित निमोनिया के इस पहले टीके को भारत के औषधि महानियंत्रक (DGCI) से भी मंजूरी मिल गयी है. पुणे की कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने क्लिनिकल ट्रायल के पहले, दूसरे और तीसरे चरण के आंकड़े विशेष विशेषज्ञ समिति (एसईसी) की मदद से डीसीजीआई को उपलब्ध कराए थे.
डीजीसीआई ने आंकड़ों की समीक्षा की और इसके बाद ‘न्यूमोकोकल पॉलीस्काराइड कॉजुगेट टीके’ को बाजार में उतारने की अनुमति दे दी.
यह टीका इंजेक्शन की मदद से लगेगा. यह टीका इंट्रामस्कुलर यानी पेशियों में लगाए जाने वाला है.
मंत्रालय ने बताया कि इस टीके का उपयोग निमोनिया से बचाव हेतु बड़े पैमाने पर किया जाएगा. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने डीसीजीआई से टीके के पहले, दूसरे और तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल भारत में करने की मंजूरी ली. इसका ट्रायल गाम्बिया में भी हुआ है.
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, निमोनिया के क्षेत्र में यह पहला स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन है. इससे पहले इस तरह के टीके की मांग काफी हद तक पूरी हुई थी, लेकिन विदेशी कंपनियों ने ही वैक्सीन बनाई थी. देश में लाइसेंस प्राप्त कंपनी द्वारा ऐसा पहली बार हुआ है.
यह वैक्सीन फेफड़ों की सूजन बढ़ाने वाली स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया जीवाणु से लड़ने हेतु शरीर को ताकत देती है. यह आमतौर पर बच्चों को 2, 4, 6 और 12 से 15 साल की उम्र में लगाया जाता है.
निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें फेफड़ों (लंग्स) में इन्फेक्शन हो जाता है. निमोनिया होने पर फेफड़ों में सूजन आ जाती है और कई बार पानी भी भर जाता है.