कार्यशाला का उद्देश्य सभी हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल बनाना, कृषि बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा देने के लिए रणनीति तैयार करना और 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए जमीनी स्तर पर किसानों की क्षमता का निर्माण करना था
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने 30 जुलाई, 2020 को नई दिल्ली में एक कार्यशाला का आयोजन किया, जिसके तहत आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में हाल ही में किए गए संशोधन और किसानों के उत्पादन, व्यापार और वाणिज्य (बढ़ावा और सुविधा) अध्यादेश, 2020 को अधिनियमित करना और मूल्य आश्वासन और फार्म सेवा अध्यादेश, 2020 पर किसानों (सशक्तीकरण और संरक्षण) के साथ समझौता पर विचारों का आदान-प्रदान करना शामिल था।
इस कार्यशाला का उद्देश्य किसानों के लिए विनियामक पर्यावरण के उदारीकरण के बदलते संदर्भ में, कृषि उपज और किसानों के सशक्तीकरण में अंतर-राज्यीय व्यापार पर प्रतिबंध को हटाना और किसानों के सशक्तीकरण के लिए लंबे समय से प्रतिक्षित ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु रणनीति के तहत संसाधकों, समूहकों, थोक व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, निर्यातकों के साथ सीधे जुड़ना शामिल है। कार्यशाला में विचार-विमर्श उन क्षेत्रों की पहचान पर केंद्रित है, जहां उत्पादन की प्रणाली पर इन संशोधनों के कारण उतपन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए विभिन्न हितधारकों (मंत्रालयों, नियामक प्राधिकरण, निजी क्षेत्र, सहकारी समितियों/पीएसी, किसानों, आदि) द्वारा हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, इसके तहत कृषि उपज/वस्तुओं का भंडारण और व्यापार, विनिर्माण को बढ़ाना, बुनियादी ढाँचे के विकास में तेजी लाना, निवेश को आकर्षित करना और खपत-आधारित विकास को बढ़ावा देना है। इसका लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के विशिष्ट परिणाम प्राप्त करने के लिए बुनियादी सुविधाओं को प्रदान करने और जमीनी स्तर पर किसानों की क्षमता का निर्माण करने के लिए निवेश को बढ़ावा देने हेतु रणनीति तैयार करने तथा सभी हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल करना भी था।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) के सचिव श्री सुधांशु पांडे ने जोर दिया कि प्रशासकों को नेताओं की दृष्टिकोण (विजन) को वास्तविकता में बदलने की आवश्यकता है। प्रख्यात बुद्धिजीवी और वरिष्ठ अधिकारी श्री सिराज हुसैन, फेलो आईसीआरआईईआर; डॉ. अशोक दलवई, अध्यक्ष, राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण; श्री संदीप नायक (आईएएस), प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम; श्री विवेक अग्रवाल (आईएएस), संयुक्त सचिव, कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग; श्री बी.बी. पटनायक, भूतपूर्व अध्यक्ष, भण्डारण विकास नियामक प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए); उद्योग मंडलों के प्रतिनिधि जैसे फिक्की से श्री रमेश दोरीस्वामी, प्रबंध निदेशक, नेशनल बल्क हैंडलिंग कॉरपोरेशन; सीआईआई की ओर से डैनफॉस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री पी. रविचंद्रन; नेशनल कोलेटरल मैनेजमेंट सर्विस से श्री अनुपम कौशिक; श्री केदार देशपांडे,एमडी और सीईओ नेशनल ई-रिपोजिटरी लिमिटेड; नेनीतिगत हस्तक्षेपों के लिए क्षेत्रीय आवश्यकताओं को रेखांकित करते हुए व्याख्यान दिए। इस कार्यशाला में श्री पट्लूरी श्रीनिवास, अध्यक्ष, डब्ल्यूडीआरए; श्री टी. के. मनोज कुमार (आईएएस), सचिव डब्ल्यूडीआरए; श्री रबीन्द्र अग्रवाल (आईएएस), ईडी अधिप्राप्ति, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई); सुश्री नंदिता गुप्ता, संयुक्त सचिव (भंडारण), डीएफपीडी; श्री अरुण श्रीवास्तव, प्रबंध निदेशक, केन्द्रीय भण्डारण निगम और श्री एन. के. ग्रोवर, प्रबंध निदेशक, सेंट्रल रेलसाइड वेयरहाउस कंपनी लिमिटेड; भी उपस्थित थे।
इस कार्यशाला में जानकारी युक्त परिचर्चा हुई और डब्ल्यूडीआरए के साथ गोदामों का अनिवार्य पंजीकरण, कृषि वस्तुओं के व्यापार के लिए समग्र प्लेटफार्मों की नींव, विवादों के समाधान के लिए जीएसटी परिषद की तर्ज पर कृषि परिषद की स्थापना, कोल्ड स्टोरेज पर निवेश और यंत्रीकृत परिवहन, फार्म गेट लॉजिस्टिक्स जैसे कई सुझाव भी सामने आए। डीएफपीडी के सचिव ने अपने समापन भाषण में कहा कि इस कार्यशाला से जो भी सुझाव सामने आए, उन्हें तीन महीने की समयावधि के भीतर लागू कर दिया जाएगा।