राजनांदगांव : अखिल भारतीय हाकी प्रतियोगिता पर अघोषित ब्रेक…

राजनांदगांव :- संस्कारधानी को नर्सरी की पहचान देने वाले खेल हाकी को प्रशासनिक उदासीनता का सामना करना पड़ रहा है। हर वर्ष होने वाली अखिल भारतीय हाकी प्रतियोगिता को लेकर प्रशासन ने अब तक कोई कारगर तैयारी नहीं की है।

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राजनांदगांव । संस्कारधानी को नर्सरी की पहचान देने वाले खेल हाकी को प्रशासनिक उदासीनता का सामना करना पड़ रहा है। हर वर्ष होने वाली अखिल भारतीय हाकी प्रतियोगिता को लेकर प्रशासन ने अब तक कोई कारगर तैयारी नहीं की है। आयोजन का जिम्मा दिग्विजय स्टेडियम समिति उठाती है। प्रतियोगिता का संचालन छग हाकी करता है। प्रशासन को केवल जरूरी व्यवस्था करनी होती है, लेकिन वह इस वर्ष अब तक की ही नहीं जा सकी है। सर्दी के मौसम के विदाई यानी दिसंबर-जनवरी में होने वाली यह प्रतियोगिता कमजोर तैयारी के बीच अब गर्मी शुरू होने के बाद मुश्किल मानी जा रही है। आपातकाल को छोड़ 77 वर्षों में पहली बार इस प्रतियोगिता पर ब्रेक लगता दिख रहा है।

राजनांदगांव रियासत की रानी सूर्यमुखी देवी की स्मृति में 77 वर्षों से यह प्रतियोगिता कराई जा रही है। यह टूर्नामेंट हाकी इंडिया से मान्यता प्राप्त होने के कारण अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुरूप से कराई जाती है। राज्य के सबसे बड़ी हाकी प्रतियोगिता को लेकर प्रशासन की सुस्ती से खेलप्रेमियों में निराशा देखी जा रही है।

गर्मी में मुश्किल है आयोजन कराना

शुरुआत से ही यह प्रतियोगिता ठंड के मौसम में ही कराई जाती रही है। इस बार कोरोना के कारण प्रक्रिया की शुरुआत ही देर से की गई। अब तो मौसम का मिजाज गर्म होने लगा है। अब तक ठोस तैयारी भी नहीं की जा सकी है। ऐसे में अप्रैल में ही आयोजन संभव होगा, लेकिन तब तब गर्मी प्रचंड हो चुकी होगी। उस समय आयोजन करा पाना मुश्कल होगा।

आपातकाल में ही हआ अंतराल प्रतियोगिता की प्रसिद्धि पूरे देशभर में है। यही कारण है कि एक आमंत्रण पर ही देश की नामी टीमें हिस्सा लेने पहुंच जाती हैं। ऐसी कोई टीम नहीं है जिसने यहां न खेला हो। यही कारण है कि अब तक इस प्रतियोगिता में कभी ब्रेक नहीं लगा। हां, आपातकाल के दौरान दो वर्ष इसे रोकना पड़ा था। पिछले वर्ष प्रतिकूल परिस्थितियों के बाद भी आयोजन रोका नहीं गया, लेकिन इस साल प्रशासनिक सुस्ती के कारण प्रतियोगिता को लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।

रात्रिकालीन प्रतियोगिता कराकर जारी रख सकते हैं परंपरा

एस्टोटर्फ वाले राज्य के पहले अंतर्राष्ट्रीय हाकी स्टेडियम में वैसे तो सभी जरूरी खेल सुविधाएं हैं, लेकिन बड़ी कमी फ्लड लाइट की है। आधे अरब से भी अधिक लागत से तैयार इस स्टेडियम में फ्लड लाइट की व्यवस्था नहीं है, लेकिन जानकारों का कहना है कि आयोजन की परंपरा बनाई रखनी है तो शासन-प्रशासन स्तर पर ठोस तैयारी कराकर इसकी व्यवस्था कराई जा सकती है। इससे रात्रिकालीन प्रतियोगिता का रास्ता खुल जाएगा।

इसके लिए कम से कम साढ़े तीन करोड़ रुपए खर्च अनुमानित बताया जा रहा है। हालांकि तीन वर्ष पहले फ्लड लाइट के लिए राज्य शासन को खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से प्रस्ताव भेजा जा चुका है। राजनीतिक तौर पर मदद नहीं मिलने के कारण मामला उससे आगे बढ़ ही नहीं सका।