राजनांदगांव : जिले में कोरोना का संक्रमण जब रफ्तार के साथ बढ़ रहा था। लॉकडाउन में लोग घरों तक सिमटे थे। संक्रमण का ऐसा खौफ था कि पड़ोस का कोई व्यक्ति पॉजिटिव आ जाए तो आसपास के लोग उस परिवार से दूरी बना लेते थे। बात तक नहीं करते थे। ऐसे मुसीबत वक्त में उन नर्सेज की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता जो कि घर-परिवार की जिम्मेदारी को कंधे पर लिए हुए खुद संक्रमण के खतरों के बीच जूझते हुए दूसरे मरीजों की सेवा करती रहीं। कुछ नर्सेज ऐसी हैं जिन्होंने कोरोना काल में अपनों को खो दिया पर दूसरों की सेवा से कभी मुंह नहीं मोड़ा। अपने दर्द को छिपाए हुए ये समाज में मानव सेवा का संदेश देती आ रहीं हैं। इनका कहना है कि महिलाएं अबला नहीं बल्कि शक्ति का रूप हैं। इसलिए हर बुरे हालात का सामना करते हुए महिलाओं को आगे बढ़ना चाहिए।

कोरोना ने बहुत कुछ छीना फिर भी हिम्मत बनाए रखी
बसंतपुर स्थित मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में कार्यरत नर्स कल्पना रमण को स्वास्थ्य के क्षेत्र में सेवाएं देते 29 साल हो गए हैं। कल्पना ने भास्कर को बताया कि कोरोना ने परिवार का बहुत कुछ छीन लिया। इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी। बताया कि जब जिले में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा था, तब इंजेक्शन रूम में ड्यूटी करती थीं। इंजेक्शन लगवाने कई मरीज आते थे। इनके संपर्क में आने से खुद कोरोना संक्रमित हुई। पति भी संपर्क में आए। कोरोना संक्रमण के चलते पति की दिसंबर माह में मौत हो गई। पति के जाते ही परिवार की पूरी जिम्मेदारी खुद पर आ गई। कल्पना ने बताया कि दूसरे मरीजों की तकलीफ देखकर अपने दर्द को भुलाते हुए सेवा में जुट गईं।
संक्रमित होने के बाद हिम्मत नहीं हारी डटी रही
नर्स लीना टोडर के पति बीएसएफ में सेवाएं दे रहे हंै। इसलिए परिवार से दूर रहते हैं। लीना को ही परिवार की पूरी जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। बताया कि घर पर बीमार सास की भी सेवा करनी पड़ती है। ऐसे वक्त में अस्पताल में ड्यूटी करते हुए कोरोना संक्रमित हो गई थीं। कुछ दिन तक इलाज चला फिर ठीक होकर लौटीं तो रूटीन के तौर पर फिर से कोविड अस्पताल में ड्यूटी लग गई। लीना ने बताया कि दोबारा ड्यूटी लगी तो मना नहीं किया बल्कि सेवा में जुट गई ताकि मरीजों के इलाज में कोई दिक्कत न हो। लीना का कहना है कि मरीजों की सेवा ही ईश्वर की सेवा है तभी तो इतने मुसीबत भरे वक्त में भी परिवार को संभाल पा रहीं हैं। आत्मविश्वास जरूरी है।
अब दूसरों के बिखरते परिवारों को जोड़ रहीं
सखी वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक गायत्री साहू बिखरते परिवारों को जोड़ने अहम भूमिका निभा रही हैं। कभी खुद ही परिवार की परेशानी, आर्थिक तंगी और दिक्कतों से जूझती रही। संघर्ष के दौर में खुद की पढ़ाई पूरी की और निजी नौकरियों से परिवार को भी संभाले रखा। गायत्री अब दूसरों के टूटते परिवारों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। सखी सेंटर में पति-पत्नी के आने वाले विवादों से लेकर प्रताड़ित महिलाओं को उनका हक दिला रही हैं। दोनों पक्षों को समझा बुझाकर उनके परिवारों को बिखरने से बचाती हैं। गायत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान कुल 619 प्रकरणों में से 582 प्रकरणों को हल कर प्रभावितों को उनका हक दिलाया है।
source : bhaskar.com










































