
राजनांदगांव। विधानसभा चुनाव के तीन साल पहले ही पूरे छत्तीसगढ़ के साथ राजनांदगांव में भी मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आयोग की टीम घर-घर पहुंच चुकी है। गणना पत्रक भी लगभग जमा हो चुके हैं। एसआईआर की रिपोर्ट में जो डेटा सामने आए हैं उनमें 40 हजार मतदाताओं को डी केटेगरी में रखा गया है। अर्थात इन मतदाताओं की कोई जानकारी नहीं है।

आयोग का कहना है कि मौत, स्थानांतरण, पलायन आदि कारणों से सूची से नाम हटाए जा रहे हैं। दो जगह मतदाता सूची में नाम हैं तो एक जगह से हट जाएगा। गौरतलब है कि जिले में 8 लाख 35 हजार मतदाता हैं। एसआईआर के तहत आयोग की टीम ने घर-घर दस्तक दी है। गणना पत्रक फार्म भरवाया गया है।
बीएलओ एप में फार्म जमा हो चुके हैं। हालांकि फार्म जमा करने की अंतिम तिथि 11 दिसंबर है। एसआई की जो रिपोर्ट मिली है। उसमें चौकाने वाली जानकारी सामने आई है। डेटा में 40 हजार मतदाता ऐसे हैं जिसके बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं है। इन मतदाताओं को डी केटेगरी में शामिल किया गया है। बताया जाता है कि इनमें से कई मतदाताओं की मौत हो चुकी है। कई तो दूसरे राज्य या फिर शहर में शिफ्ट हो चुके हैं।
बड़ी संख्या में विशेषकर मजदूर वर्ग महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्य पलायन कर चुके हैं और कई तो वहां निवास करते हैं। चूंकि 2003 के बाद यह विशेष अभियान चल रहा है, इसलिए अब नाम विलोपित हो रहे हैं। आयोग का कहना है कि जिन मतदाताओं की कोई जानकारी नहीं है। वे 15 जनवरी तक दस्तावेज उपलब्ध करा सकते हैं।
इस तारीख तक ये मतदाता दावा-आपत्ति कर वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं। आयोग का कहना है कि अभी 40 हजार मतदाताओं के नाम गायब हैं लेकिन 11 दिसंबर तक ये आंकड़े और बढ़ सकते हैं। बाहर से जो मतदाता आए हैं वे भी जुड़ रहे हैं। हालांकि 2003 की मतदाता सूची में नाम जरूरी है और उसी आधार पर पत्रक जमा हो रहे हैं।









































