
लोक संस्कृति की झलक ने किया सभी को मंत्रमुग्ध
राजनांदगांव। संस्कारधानी राजनांदगांव में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति एक बार फिर जीवंत हो उठी जब लखोली के राहुल नगर में गौरा-गौरी पर्व बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। स्थानीय समिति द्वारा तीन दिनों तक चले इस पारंपरिक पर्व में भक्ति, आस्था और लोकगीतों की मधुर गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
तीन दिवसीय आयोजन के दौरान भगवान शिवजी, माता पार्वती और लक्ष्मीजी की प्रतिमाओं की विधिवत स्थापना कर पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने नित्य आरती, भजन-कीर्तन और पारंपरिक विधि से पूजा में सहभागिता निभाई।पूजा-अर्चना उपरांत बाजे-गाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ निकाली गई गौरा-गौरी विसर्जन शोभायात्रा पूरे क्षेत्र का आकर्षण बन गई। यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोग उत्साहपूर्वक नाचते-गाते आगे बढ़े।
लोक संस्कृति की इस झलक ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। शोभायात्रा में प्रसिद्ध लोकगायिका सावित्री जंघेल ने अपनी मधुर आवाज में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति दी। जिससे वातावरण में लोकसंगीत की मधुरता घुल गई। उनके गीतों पर लोग झूम उठे। शोभायात्रा में कन्याएं कलश लेकर पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं। वहीं सुवा नृत्य की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में और भी रंग भर दिए।
महिलाओं, नवयुवकों और बुजुर्गों का उत्साह देखने लायक था पूरा क्षेत्र जय गौरा-गौरी के जयकारों से गूंज उठा।इस अवसर पर वार्ड पार्षद गिरिजा संतोष निर्मलकर ने शोभायात्रा में सम्मिलित होकर सभी को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं और बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे पारंपरिक पर्व हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक हैं। गौरा-गौरी पर्व न केवल भक्ति का प्रतीक है बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, आपसी प्रेम और एकजुटता का संदेश भी देता है। लखोली में मनाया गया यह पर्व लोगों की स्मृतियों में लंबे समय तक अंकित रहेगा।









































