
▶️ हजारों लोगों की उपस्थिति में हुआ मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम
राजनांदगांव । बच्चों में अपने माता-पिता के प्रति आदरभाव के उत्तम संस्कारों का सिंचन हो, माता-पिता का अनुभव व आशीर्वाद लेकर उन्नत जीवन की ओर अग्रसर करने हेतु तथा 14 फरवरी को सच्चा प्रेम-दिवस मनाने के लिए पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के पावन प्रेरणा से श्री योग वेदांत सेवा समिति द्वारा पिछले 16 वर्षों से देश-विदेशों में ‘मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रमों’ का आयोजन किया जा रहा है ।
पूर्व राष्ट्रपति सहित कई केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, राज्यपाल आदि अन्य गणमान्य लोगों ने इस कार्यक्रम की सराहना की है ।
इसी क्रम में राजनांदगांव के वार्ड नंबर 1 व 2 में 14 फरवरी को ‘मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम’ मनाया गया । श्री योग वेदांत सेवा समिति के जिला अध्यक्ष रोहित चंद्राकर व सचिव लेखराम साहू ने बताया गया कि ‘‘इस कार्यक्रम की शुरुआत दीप-प्रज्जलन, वैदिक मंत्रोच्चार, गणेश वंदना व गुरु-प्रार्थना से हुई । अतिथियों के करकमलों से बच्चों को पुरस्कृत किया गया ।’’ फिर शुरू हुआ मातृ-पितृ व गुरुजनों का पूजन ।
माता-पिता को आसन में बिठाकर किया पूजन
बच्चों ने अपने माता-पिता को आसन पर बिठा के तिलक किया, फूल-मालाएँ पहनायीं और परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की । यह देख माता-पिताओं की आँखें छलक उठीं और उन्होंने बच्चों को गले लगाकर शुभ आशीष दिया । अभिभावकों के साथ बच्चे भी भावविभोर हो गये । कार्यक्रम की पूर्णाहुति आरती व प्रसाद-वितरण व भंडारे के साथ हुई । उपस्थित मान्यवरों ने इस कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की ।
बाल संस्कार केंद्र के जिला प्रभारी संजय साहू ने बताया कि है संत श्री आशारामजी आश्रम के आवाहन पर पूरे देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी भारतीय परम्परा को पुनः जागृत कर बच्चों को अपने माता-पिता का तिरस्कार न करके उनका आदर सम्मान करने के संस्कारों से युक्त बनाने हेतु 14 फरवरी को ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ के रूप में मनाया गया ।
राजनांदगांव जिले में 470 से अधिक स्थानों में यह कार्यक्रम सम्पन्न किया गया । जिसमे लगभग 1 लाख बीस हजार से अधिक युवा व विद्यार्थी अपने माता-पिता का पूजन कर शुभाशीष पाया । संत श्री आशारामजी बापू की प्रेरणा से पिछले 16 वर्षों से चलाये जा रहे इस ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ अभियान ने आज भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी एक पर्व के रूप में अपना स्थान बना लिया है ।
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, पारसी – सभी धर्मों के लोगों ने हृदयपूर्वक यह पर्व स्वीकार किया है । इस कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के टीके चंद्राकर, महेश रायचा, नतेस्वर साहू, मोहित साहू, भोज वर्मा, खिलेंद्र साहू, छोटेलाल जंघेल, प्रवीण चक्रधारी, वीरेंद्र साहू, उमाशंकर कुंवर, राजू वर्मा, जीत, तृप्ति वैष्णव, एरिना चंद्रवंशी, मालती जंघेल, चंद्रप्रभा साहू, सरिता चक्रधारी, एकता चंद्राकर, अंजू निषाद आदि का विशेष सहयोग रहा ।









































