राजनांदगॉव : धर्मान्तरण को संरक्षण देने की सुनियोजित साजिश है रा0सु0का0 – मधुसूदन यादव…

राजनांदगॉव – पूर्व सांसद राजनांदगॉव मधूसूदन यादव ने सत्तासीन कांग्रेस सरकार पर यह आरोप लगाया है कि शासन-प्रशासन के संरक्षण में विगत कुछ वर्षाे में प्रदेश में धर्मान्तरण की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। प्रदेश में कांग्रेस शासन के संरक्षण में सुदूर वनांचल क्षेत्रों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में एवं कम आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी छुपे तेजी से अवैधानिक धर्मांतरण का अभियान चलाया जा रहा है।

एक सोची-समझी साजिश के तहत धर्म विशेष के आबादी को बढ़ाने के लिये और प्रदेश की अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातीय सभ्यता, संस्कृति एवं विरासत को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य में भूपेश सरकार के संरक्षण में ग्रामीण, शहरी एवं वन क्षेत्रों में बढ़ रहे धर्मांतरण की घटनाओं से प्रदेश के आदिवासी भाइयों के अस्मिता एवं सामाजिक व्यवस्था पर बड़ा हमला हुआ है, जिसके विरोध एवं प्रतिकार में समाज का एक बड़ा तबका राज्य सरकार से आरपार की लड़ाई लड़ने के लिये लामबद्ध हो चुका है, और इस बात का अंदेशा राज्य की कांग्रेस सरकार को भलिभांति है।

इसी तबके के प्रतिकार सेे घबराये हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने, आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, कांग्रेस सरकार की वर्षाे पुरानी दमनकारी नीति की परिपाटी को आगे बढ़ाते हुए राज्य में  राष्ट्रीय सुरक्षा कानून  (रा0सु0का0) लागू करने का निर्णय लिया है। संवैधानिक व्यवस्था के विरूद्ध जाकर जो लोग प्रदेश में धर्मान्तरण के कार्यो में सक्रीय हैं, उनको संरक्षण देने के लिये यह कानून लाया गया है। उल्लेखनीय है कि दिनांक 03.01.2023 को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अपने राजपत्र असाधारण में प्रकाशित अधिसूचना के द्वारा छत्तीसगढ़ के 31 जिलों के जिला दण्डाधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 की धाराओं में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रदेश के क्षेत्रों में अपने अधिकारिता की सीमा के भीतर किसी भी व्यक्ति के विरूद्ध कार्यवाही का अधिकार दिया गया है।

रा0सु0का0 के अंतर्गत केन्द्र एवं राज्य शासन को किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत राष्ट्रद्रोह की धारा अंतर्गत कार्यवाही करने का अधिकार प्रदान किया गया है। तत्संबंध में प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष मुधसूदन यादव ने बताया कि यह कानून देश में सुरक्षा एवं सौहार्द की व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशीलता से लागू किया जाना चाहिये किंतु मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, जो स्वयं को आगामी विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत असुरक्षित महसूस कर रहे हैं एवं आदिवासियों के धर्मांतरण के प्रति समाज में व्याप्त विरोध एवं असंतोष से भयभीत हैं,

वो अपने विरोधीस्वरों का गला घोट देना चाहते हैं। इसलिये मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस पार्टी द्वारा  रा0सु0का0  को राज्य में सांप्रदायिकता भड़काने वालों पर अंकुश लगाने वाला कानून बताकर गुमराह किया जा रहा है, और इस कानून की आड़ में प्रदेश में सक्रीय धर्मांतरण गैंगों को बल प्रदान करने के लिए, साथ ही साथ, अपने राजनैतिक प्रतिद्वंदीयों से पीछा छुड़ाने के अपने निजी स्वार्थ को साधने के लिये प्रयोग किया जा रहा है। वरिष्ठ भाजपा नेता मधुसूदन यादव ने कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कांग्रेस पार्टी की दमनकारी एवं तानाशाही नीतियों का इतिहास गवाह रहा है।

  अपने  राजनीतिक विरोधियों के दमन के हथियार के रूप में सर्वप्रथम सन 1950 में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सरकार में भारत में प्रीवेंटिव डिटेंशन एक्ट लागू किया गया जो सन 1969 में समाप्त हुआ। उसके बाद 1971 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के द्वारा मेंटेनेंस ऑफ इंटरनेशनल सिक्योरिटी एक्ट (मीसा) लागू किया गया । मीसा का दुरुपयोग कांग्रेस पार्टी द्वारा इमरजेंसी के दौरान सन 1975 में अपनी प्रतिद्वंदी राजनीतिक पार्टी के नेताओं से दुश्मनी भुनाने के औजार के रूप में किया गया,

जिसे सन 1977 में देश में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद खत्म कर दिया गया । किंतु 1980 में जब इंदिरा गांधी पुनः प्रधानमंत्री बनी, तब उनकी सरकार ने 23 सितंबर 1980 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून संसद में पास करवाया और 27 दिसंबर 1980 को देश में यह कानून लागू किया गया। श्री यादव ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून कांग्रेसी नेताओं के हिटलरशाही नीतियों की ही पैदाईश हैं ।