राजनांदगांव : 10 दिनों में मिले 177 नए संक्रमित बाजार में घटी सैनिटाइजर की बिक्री…

राजनांदगांव : वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के खिलाफ सैनिटाइजर को सबसे कारगार हथियार माना गया था। पिछले साल कोरोना का कहर शुरू हुआ था, तो सैनिटाइजर की डिमांड कई गुना बढ़ गई थी। पूर्ति नहीं होने के कारण सैनिटाइजर की कालाबाजारी भी हुई। लोगों को कई गुना कीमत देकर सैनिटाइजर खरीदना पड़ा था। कोरोना संकट काल में सैनिटाइजर की खपत बढ़ी हुई थी। कोरोना काल के आठ माह में सैनिटाइजर का करोड़ों का व्यापार हुआ, लेकिन वर्तमान में इसकी पूछपरख नहीं हो रही है। सैनिटाइजर का बाजार ठंडा ही पड़ गया है।

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जिला मेडिकल एसोसिएशन की मानें तो एक माह में मुश्किल से 50 हजार का सैनिटाइजर बिक रहा है। जबकि संकटकाल में हर दिन 10 से 15 लाख रूपये का व्यापार हो रहा था। लोग अब कोरोना संक्रमण के दूसरे रूप को हल्के में ले रहे हैं। यही कारण की धीरे-धीरे कोरोना जिले में फिर फैल रहा है। पिछले दस दिनों में जिले में कोरोना के 177 नए मरीज

सामने आए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना का संक्रमण जिले में किस तरह बढ़ रहा है। ऐसे वैश्विक महामारी की अनदेखी लोगों के लिए भारी पड़ सकती है।

संकट काल में कालाबाजारी भी : कोरोना संकटकाल में सैनिटाइजर की जमकर कालाबाजारी भी हुई। जिसके कारण आम लोगों को कोरोना से बचने के लिए महंगी कीमतों पर सैनिटाइजर खरीदना पड़ा था।

लोग भी संकट काल में सैनिटाइजर को कोरोना की दवाइ मानकर उपयोग कर रहे थे। ऐसे समय में नगर निगम में सैनिटाइजर घोटाला का मामला भी सामने आया था। वहीं मेडिकल दुकानों में भी सैनिटाइजर की निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बेचने का मामला पकड़ा गया था। कोरोना काल में सैनिटाइजर की कालाबाजारी के खिलाफ दर्जनों कार्रवाई भी हुई। और आज बाजार में इसकी डिमांड महज 15 से 20 फीसद हो गई है।

महामारी के दौरान सभी बैंक और एटीएम बूथों पर सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई थी। ताकि एटीएम का उपयोग करने से पहले उपभोक्ता हाथों को सैनिटाइज कर लें। लेकिन वर्तमान में शहर के सभी एटीएम बूथों में रखे सैनिटाइजर के डिब्बे खाली है। कई एटीएम में तो सैनिटाइजर ही नहीं है। बैंकों में भी सैनिटाइजर की व्यवस्था नहीं के बराबर है। यही नहीं रूपये निकालने पहुंच रहे ग्राहक भी अब एटीएम में शारीरिक दूरी का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके कारण ही संक्रमण बढ़ने का खतरा बढ़ता जा रहा है।