
डोंगरगढ़ – संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ससंघ चंद्रगिरी डोंगरगढ़ में विराजमान है | आज के प्रवचन में आचार्य श्री ने कहा की कुछ लोग वर्तमान में उलझे हुए रहते हैं कुछ भूत में और कुछ भविष्य में | जबकि हमें अपने कर्म की ओर दृष्टि रखना चाहिये जो हमने भूत में किया है
उसे वर्तमान में भोग रहे हैं और जो वर्तमान में कर रहे हैं उसे भविष्य में भोगना निश्चित है जिससे आज तक कोई भी बच नहीं सका है और ना ही बच पायेगा | उदाहरण के माध्यम से आचार्य श्री ने बताया की राजा श्रेणिक के बारे में तो आप लोग जानते ही है | जो भविष्य में तीर्थंकर बनने वाला है वो आज कौन सी गति में है इसका विचार करो
जिस प्रकार परीक्षा में अनिवार्य प्रश्न और वैकल्पिक प्रश्न होते हैं | यदि आपने वैकल्पिक प्रश्न हल कर लिया और अनिवार्य को छोड़ दिया तो आप अनुतीर्ण हो जायेंगे और यदि आपने अनिवार्य को हल कर लिया तो आप उत्तीर्ण हो जायेंगे | ऐसे ही हमें जो आवश्यक है उसे पहले करना चाहिये और विकल्प की ओर ध्यान नहीं देना चाहिये| एक व्यक्ति हमारे पास आया और कहता है हमें आशीर्वाद दो की हम इस वर्ष प्रशासनिक परीक्षा में पास हो जायें |
चार बार मुख्य परीक्षा में पास होने के बाद भी वेटिंग क्लियर नहीं हो रही है | हमने कहा की अपनी तैयारी जारी रखें और लक्ष्य प्रथम आने का नहीं बल्कि अपनी तैयारी पूर्ण करने का रखें | यह प्रशासनिक परीक्षा का पैटर्न ही ऐसा है जिसमे अंतिम चरण में तीन में से एक ही उत्तीर्ण होता है इसमें सभी का पूर्ण प्रयास होता है परन्तु भाग्य का साथ भी आवश्यक है |









































