मुख्यमंत्री को नहीं दिख रहा है दाल में काला, जबकि पीएससी भर्ती  में पूरी दाल ही काली है – मधुसूदन यादव….

छत्तीसगढ़ में विगत दिनों पीएससी परीक्षा 2021 के परिणाम घोषित होने के बाद युवाआंे द्वारा पीएससी भर्ती में भ्रष्टाचार एवं भाई-भतीजावाद के अरोपों से पूरे प्रदेश में हड़कम्प मचा हुआ है और इस घोटाले के तार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक सहित छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े हुए प्रतीत होते हैं। उक्त आरोप लगाते हुए पूर्व सांसद एवं प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष मधुसूदन यादव ने लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम को प्रदेश के मेधावी युवाओं के मेहनत और भविष्य से खिलवाड़ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है कि पीएससी जैसी संवैधानिक संस्था में राजनैतिक दखलंदाजी, नौकरशाहों के हस्तक्षेप और रसूखदारों के दबाव में परिक्षा परिणाम घोषित कर, अपात्र अभ्यर्थियों के चयन से, लोक सेवा आयोग एवं चयनित पद की गरिमा धूमिल हुई है।

इस परीक्षा परिणाम के टापर्स की लिस्ट का अवलोकन करने पर प्रथम दृष्ट्या इसमें नौकरशाहों, राजनेताओं एवं रसूखदारों के बच्चों, भतीजों और भंाजे-भंजियों का दबदबा साफ दिखाई देता है, जिससे इस भर्ती परीक्षा का मामला न्यायालयीन पचड़े में पड़कर अटकने की प्रबल संभावना प्रतीत हो रही है। पूर्व सांसद मधु ने आगे कहा है कि पीएससी भर्ती परीक्षा 2021 में चयन प्रक्रीया को लेकर कई तरह के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। देश के इतिहास में प्रथम बार किसी प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद परीक्षा का प्रादर्श उत्तर माला (मॉलड आंसर की) जारी किया गया है, जबकि कायदे से इसे परीक्षा के तत्काल बाद एवं परीक्षा परिणाम आने से पहले जारी किया जाता है। पीएससी के अध्यक्ष पर सिंडीकेट बनाकर घोटाला करने और अपने बेटे, भतीजे और भांजी के नाम के सरनेम को छुपाकर सिलेक्शन करने के आरोप भी बेहद सनसनीखेज है, जिसकी सत्यता की जॉच आवश्यक है।

कई परिक्षार्थियों ने लोक सेवा आयोग की इस परीक्षा में यह गड़बड़ी का भी आरोप लगाया है कि प्रश्नों के उत्तर में संशोधन किया गया है, जिसका आंसर शीट जारी ही नहीं किया गया है। परिक्षा परिणामों में बड़े अधिकारियों एवं राजनेताओं के रिश्तेदारों को पात्र अभ्यर्थियों के रूप में चयनित किया गया है जिनका पिछला ट्रेक रिकार्ड देखने पर इनमें से अधिकांश सफल अभ्यर्थियों का औसत और उससे भी निम्न स्तर का पूर्व प्रदर्शन रहा है, जो कि जॉच का विषय है। इस पीएससी घोटाले से एक तरफ राज्य के लाखों मेधावी छात्र एवं युवा अपने मेहनत के फल से वंचित रह गये है और अपनी साधारण परिस्थिति के बावजूद मेहनत के दम पर पीएससी में सफलता प्राप्त करके प्रशासनिक क्षेत्र में कैरियर बनाने के सपने जो उन्होंने देखे थे, वो सभी बेहद निराश, हतोत्साहित एवं प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।

दूसरी तरफ अयोग्य, भ्रष्ट और पैसे का लेनदेन करके लोक सेवा में पद पाने वाले चयनित प्रतिभागीयों एवं अधिकारियों से आप किसी प्रकार की न्याय, सुशासन एवं प्रदेश के सुखमय भविष्य की उम्मीद नहीं कर सकते। भाजपा नेता मधु ने आरोप लगाया कि लोक सेवा आयोग के इस घोटाले को लेकर भूपेश सरकार के विरूद्ध प्रदेश के होनहार एवं वंचित युवाओं में जबरदस्त रोष एवं आक्रोश का माहौल बना हुआ है, और उनके द्वारा शासन से बार-बार न्याय की मांग की जा रही है, किन्तु शासन प्रशासन द्वारा इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो उनके संदेहो को और पुख्ता कर रहा है।

अब इस मामले की शिकायत राजभवन तक पहुॅच चुकी है जिसमें परीक्षा के रिजल्ट को रद्द करने की मांग, जॉच के लिये उत्तर पुस्तिका सार्वजनिक करने की मांग के साथ पीएससी के अधिकारियों के नार्काे टेस्ट की मांग भी शामिल है। किन्तु इतने बवाल के मध्य भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इस प्रकरण में कहीं दाल में काला तक नजर ही नहीं आ रहा है, जबकी वास्तविकता में यहॉ पूरी दाल ही काली है। मुख्यमंत्री इस घोटाले को सिरे से खारिज करते हुए इसकी जॉच से बचने के लिये बचकाना तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं कि तथ्यात्मक जानकारी युवा अथवा विपक्षी प्रमाणित करें, जबकि अरोपों के जॉच की पूरी जिम्मेदारी लोक सेवा आयोग, सत्तासीन कांग्रेस शासन एवं स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के इस पलायनवादी एवं ढुलमुल रवैये के कारण पीएससी भर्ती घोटाले की केन्द्रीय जॉच एजेन्सी के माध्यम से निष्पक्ष जॉच की मांग और अधिक बलवती होती जा रही है।