राजनांदगांव : कर्ज माफ नहीं लेकिन, पिछले दो वर्षों का बोनस एक मुश्त…

राजनांदगांव। राज्य में कांग्रेस ‘सत्ता’ से बेदखल हो गई और अब भाजपा की सरकार बन गई है। अब किसानों की निगाहें कर्ज माफी पर है। कांग्रेस ने पिछले चुनाव सहित इस बार भी कर्जमाफी का दांव खेला था जो अब की बार काम नहीं आया। किसानों का फोकस नई सरकार की ओर है जिसे उन्होंने अपना वोट दिया था लेकिन भाजपा सरकार ने इस लेकर कोई संकेत नहीं दिया है। इस कारण से किसानों में निराशा एवं दुविधा है।

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विदित हो कि 2018 के चुनाव के अंतिम दौर में कांग्रेस ने कर्जमाफी का दांव खेला था जिसने पार्टी को प्रचंड जीत दिलाई थी। उसी करिश्में को रिपीट करने के लिए पार्टी ने इस चुनाव में भी कर्जमाफी का वादा किया था। सरकार को पिछले चुनाव जैसी सफलता की उम्मीद थी लेकिन नतीजे बिल्कुल विपरीत आये हैं। भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला है

तो कांग्रेस पिछले चुनाव की तुलना में आधी सीटें ही हासिल कर पाई है । अब के चुनाव में किसानों ने कर्ज माफी को नकार दिया है इसके बाद भी उन्हें नई सरकार से कर्ज माफ कर देने की अपेक्षा है।
उन्होंने इस बार कर्ज माफी की उम्मीद से डेर गुना कर्ज लिया है जिले में ही सरकारी बैंक ने 1250 करोड रुपए कर्ज बांटने का लक्ष्य रखा था लेकिन किसानों ने लगभग 15 सौ करोड़ का कर्ज लिया है।

इस कर्ज को किसान फिलहाल खरीदी के साथ लिंकिंग में पटा रहे हैं अब तक किसानों ने लगभग 354 करोड़ का धान बेचा है और इसे लिंकिंग में वसूली की गई राशि 53 करोड़ है अब जिन्होंने धान बेचकर लिंकिंग में अपना कर्ज अदा कर दिया है वह नई सरकार से कर्ज को माफ करने की आस लगाए हुए हैं।

धान का बोनस संसदीय क्षेत्र में 370 मिलेंगे

भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि पिछले दो वर्षों (2017 एवं 2018) का बोनस एक मुश्त 25 दिसंबर को किया जाएगा। राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र में दो सालो का करीबन 370 करोड़ का वितरण किया जाएगा। लगभग दो लाख किसानों के खाते में बोनस की राशि पहुंचेगी।

बोनस को लेकर किसानों में उत्सुकता है। शादी सीजन भी शुरू हो चुका है। ऐसे में किसानों को बोनस से बड़ी राहत मिलेगी।