VISION TIMES : उत्कृष्ट पालक बनने के लिए आवश्यक कदम…

समझदार पालक बनें – सशक्त भविष्य गढ़ें

  • कुछ घरेलू नियम बनाएं और उनका पालन करें। जैसे सोने, खाने, मनोरंजन आदि का समय निश्चित करिए।
  •     बच्चों को पूरी गुणवत्ता के साथ अपना समय दें। बच्चों से बुद्धिमानी से बात करें, उनसे धैर्य से व्यवहार करें।
  •     पति व पत्नी अर्थात बच्चे के माता-पिता को एक दूसरे के बनाए नियमों का पालन करना चाहिए व बच्चों से करवाना चाहिए।
  •     छोटे भाई-बहनों की शारीरिक लड़ाई को कभी बढ़ावा मत दीजिए। इससे हिंसात्मक व्यवहार बढ़ता है।
  •     ‘बच्चों द्वारा कोई गलती करने पर उन्हें पहले समझें फिर उन्हें सही व गलत दोनों पक्ष समझाईए। इससे विवेक जागृत होगा।
  •     प्रेम और अनुशासन के बीच संतुलन स्थापित करिए। बच्चों के सामने पति-पत्नी या परिवार की आपसी लड़ाई या मनमुटाव प्रस्तुत मत करिए यह     गलत सीख देगा।
  •     बच्चों से सोच समझकर वादा करिए मगर जो कहें उसे पूरा करिए।
  •     बच्चों में भारत वर्ष की गौरवमयी संस्कृति और नैतिक मूल्यों की स्थापना करिए। इसके लिए पर्व और त्यौहारों को
  •     बच्चों के साथ मनाइए व परिवारिक संस्कारों को अपनाइए।
  •     बच्चों में सत्य, सदाचरण, शांति, प्रेम व अहिंसा की भावना विकसित करिए। इससे बच्चों का चरित्र बहुत मजबूत होता है।
  •     बच्चों की आंखों में आंखें डालकर बात करिए उनके बस्ते, कपड़े, आलमारी की पूरी जानकारी रखिए। उनसे अंतरंगता बढ़ाइए।
  •     घर के किन्हीं दो बच्चों की कभी आपस में तुलना मत करिए। प्रत्येक बच्चा विशेष व अलग होता है। तुलना से ईर्ष्या व अहंकार बढ़ता है ना कि प्रेम।
  • उत्कृष्ट पालक बनने में बाधाएँ…
  • •    टूटते हुए घर।
  • •    घरेलू अनुशासन व घरेलू नियम कायदों का अभाव।
  • •    पालकों के पास अतिव्यस्तता के कारण बच्चों के साथ समय बिताने का अभाव।
  • •    टी.व्ही., वीडियो और इंटरनेट पर पर्याप्त नियंत्रण ना होना।
  • •    पालकों को अपनी संस्कृति और मूल्यों की गहराई और उसके प्रभाव की समझ ना होना।
  • •    बच्चों को समय ना देने के कारण अनावश्यक लाड़ प्यार करना।
  • ध्यान दें कि –
  • •    बच्चों की अति सुरक्षा करने का परिणाम होता है उनमें आत्मविश्वास का अभाव।
  • •    बच्चों को बहुत अधिक चिंता दिखाने का परिणाम होता है बच्चों में निराशा व चिंता की भावना पैदा होना।
  • •    बच्चों से अति दक्षता की उम्मीद का परिणाम है बच्चों में असफल होने की भावना का विकास।
  • •    बच्चों को बहुत ढील देने का अर्थ है। बच्चों में आक्रामक व हिंसक स्वभाव विकसित होना।
  • याद रखिए –
  • •    सबसे ज्यादा जरूरी है बच्चों से संतुलित व्यवहार….
  • •    बच्चे कैसे सीखते हैं ?
  • •    बच्चे 80 प्रतिशत बातें सीखते हैं पालकों के व्यवहार से और उन्हें देखकर।
  • •    बच्चे 20 प्रतिशत बातें सीखते हैं पालकों के उपदेशों से।
  • इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि पालक बच्चों के सामने उत्कृष्ट व्यवहार का उदाहरण पेश करें।
  • आक्रामक बच्चे
  • कुछ बच्चे आक्रामक हो जाते हैं, ऐसे बच्चों के घर में निम्नलिखित सामान्य बातें दिखाई देती हैं-
  • •    कोई घरेलू अनुशासन नहीं ।
  • •    बच्चों की कोई देखभाल व अनुश्रवण नहीं ।
  • •    नियंत्रण का अभाव।
  • •    बच्चों की समस्याएं हल ना करना।
  • •    बच्चों को शारीरिक या मानसिक तौर पर चोट पहुंचाना जैसे बच्चों के साथ मारपीट या अति
  • •    अपमानजनक व्यवहार।
  • कुछ बच्चों का व्यवहार उत्कृष्ट होता है, क्योंकि ऐसे बच्चों के माता-पिता/पालक-
  • •    बच्चों से अत्यंत गहरा प्रेमभरा बंधन रखते हैं।
  • •    अपने कर्त्तव्यों को सही तरीके से निभाते हैं।
  • •    आनंद व शांति का वातावरण परिवार में बनाए रखते हैं।
  • •    अपनी नैतिकता और मूल्यों भरे व्यवहार से बच्चों में नैतिकता और संस्कार देते हैं।
  • •    बच्चों की समस्याएं पूरी गंभीरता से समझते व सुलझाते हैं।
  • •    बच्चों में विवेक जागृत करते हैं।