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VISION TIMES : नसबंदी के बाद दो बच्चों का जन्म, क्षतिपूर्ति देने का 24 साल पुराना आदेश रद , बिलासपुर हाई कोर्ट…

रायपुर – वर्ष 1998 के बहुचर्चित छत्तीसगढ़ नसबंदी कांड के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद कर दिया है। नसबंदी के बाद बच्चा होने पर महिला ने क्षतिपूर्ति के लिए वाद दायर किया था। खास बात ये निचली अदालत के फैसले पर राज्य शासन ने महिला को 51 हजार रुपये क्षतिपूर्ति का भुगतान कर दिया था।

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वर्ष 1998 में स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र सरकार की योजना के तहत गरियाबंद के ग्राम छुरा में महिला नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर में 77 महिलाओं का चयन किया गया था। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने महिलाओं की नसबंदी की। आपरेशन कराने वाली एक महिला ने वर्षभर बाद पांचवें बच्चे को जन्म दिया। आपरेशन फेल होने का आरोप लगते हुए महिला ने रायपुर के जिला अदालत में वाद दायर किया।

इसमें कहा कि स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों की लापरवाही से उसे मानसिक आघात लगा है। सामाजिक प्रतिष्ठा को भी धक्का पहुंचा। महिला ने क्षति के रूप में एक लाख 51 हजार रुपये की मांग की। इसके अलावा दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। मामले की सुनवाई के बाद जिला अदालत ने 51 हजार रुपये पीड़ित महिला को क्षतिपूर्ति देने का आदेश जारी किया था।


वर्ष 1998 में इस मामले ने जमकर तूल पकड़ा था। खास बात ये कि नसबंदी के बाद महिला ने दो बच्चों को जन्म दिया। नसबंदी के पहले चार बच्चों की मां थी। मुआवजा राशि देने के बाद शासन ने अपनी साख बचने और ग्रामीणों में भरोसा कायम रखने के लिए कोर्ट में अपील की थी। शासन ने अपनी याचिका में कहा कि नसबंदी के बाद महिला ने पांचवें बच्चों को जन्म दिया। अगले साल एक और बच्चे को जन्म देने के बाद कोर्ट में वाद दायर किया। इससे स्पष्ट है कि क्षतिपूर्ति राशि के लालच में मामला दायर किया गया था। आपरेशन करने वाले चिकित्सकाें ने कोई गलती नहीं की थी। मामले की सुनवाई हाई कोर्ट की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसला को रद कर दिया है।

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