
जनता त्रस्त कॉरपोरेट मस्त यही है मोदी सरकार का बजट मॉडल

केंद्र सरकार द्वारा आज पेश किया गया केंद्रीय बजट देश की जनता की उम्मीदों के साथ खुला धोखा है। यह बजट न महंगाई से राहत देता है, न बेरोज़गारी पर वार करता है और न ही किसानों की बदहाली का कोई समाधान पेश करता है। पूरे बजट में सिर्फ आंकड़ों का खेल और झूठी उपलब्धियों का बखान है।
आज देश का आम नागरिक महंगाई से कराह रहा है रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और खाद्य वस्तुएं आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं, लेकिन बजट में इन पर एक शब्द की भी ठोस राहत नहीं दी गई। यह सरकार की जनविरोधी मानसिकता को उजागर करता है।
इसके अलावा किसानों को फिर धोखा मिला है, किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी देने से सरकार एक बार फिर पीछे हट गई। खाद, बीज, बिजली और सिंचाई की लागत बढ़ती जा रही है, लेकिन बजट में किसानों के लिए सिर्फ खोखले आश्वासन हैं।
युवाओं के लिए भी इस सरकार ने उन्हें भ्रम में रखने के अलावा कुछ नहीं किया देश में बेरोज़गारी ऐतिहासिक स्तर पर है, लेकिन बजट में स्थायी रोजगार सृजन की कोई ठोस नीति नहीं है। युवाओं को सिर्फ स्किल, स्टार्टअप और आत्मनिर्भरता के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है।
मध्यम वर्ग और गरीब पूरी तरह उपेक्षित हैं शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बजट की प्राथमिकताएं पूरी तरह नाकाम हैं। सरकार का झुकाव साफ तौर पर बड़े कॉरपोरेट घरानों की ओर दिखाई देता है।
कांग्रेस पार्टी स्पष्ट रूप से कहती है कि यह बजट “आम जनता के खिलाफ और चुनिंदा पूंजीपतियों के पक्ष में बनाया गया बजट” है इसलिए बजट आते ही शेयर मार्केट धड़ाम से गिरा है सेंसेक्स नीचे गिर गया है, किसी भी प्रमुख योजनाओं के लिए बजटीय आवंटन की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है, डिफेंस जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर पर वित्त मंत्री ने कुछ नहीं कहा, कांग्रेस इस जनविरोधी बजट का पुरज़ोर विरोध करती है और जनता के हक़ की लड़ाई लगातार लड़ती रहेगी।









































