
राजनांदगांव 14 मार्च। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने में महिलाये पुरूषो की तुलना में आगे है, योजना का लाभ लेकर महिलाये सशक्त हो रही है। नगर निगम राजनांदगांव द्वारा योजना के मोर जमीन मोर मकान के तहत निर्मित 4280 आवासों में 1665 आवास महिलाओं के नाम से है।
इस योजना के अन्य घटक अन्य घटक ‘‘मोर मकान मोर चिन्हारी‘‘ के अंतर्गत 360 कुल आबंटित आवासों में से 343 आवास महिला हितग्रहियों के नाम से है। इस प्रकार आवास योजना का लाभ लेने में महिलाये अग्रणी रही है।
अपने स्वयं के नाम से आवास होने पर एक महिला के मन में आत्मनिर्भरता का भाव आता है और जब इस विश्वास से जो सबलता जगती है, इससे जीवन जीने का एक नया आयाम गढा जाता है। नई सोच नये विचार नई क्रान्ति को जन्म देती है। हमारे भारत देश में महिलाओं ने अनेक कीर्तिमान स्थापित कर देश का नाम विदेशों में भी रोशन किया है।
आवास योजना के तहत् अपने स्वयं का आवास पाकर कुछ महिला हितग्राहियों के उवाच्य एवं अपने अनुभव पुरूषो की तुलना में आगे है। अनिता मेश्राम बताती है कि वो बिड़ी बांधकर अपना घर चलाती है। स्वयं का आवास नहीं होने के कारण मेरी डिलीवरी किसी और घर में हुई उम्र के लगभग 50 वर्ष मैने किराये के मकान में काटे कुछ पहचान बन पाती इसके पहले ही मकान मालिक किसी ना किसी कारण से घर से निकाल देता था।
आवास की स्वीकृति आई तो मैं खुशी से झुम उठी। थोडे-थोडे पैसे से दस साल पहले एक जगह ली थी पर उसपर घर बनाने की हिम्मत नही थी इस स्वीकृति ने एक विश्वास दिया और अनिता अपने परिवार के साथ अपने सपनो को धरा में उतारने लगी। आज मैंने अपने परिवार के सदस्यों के लिए अटैच लेटबाथ और टाईल्स वाला सुन्दर सुविधायुक्त आवास बनाकर खुश है और खुश होकर वो नगर निगम व शासन को धन्यवाद कहती है।
राजनांदगांव निकाय क्षेत्र के वार्ड कमांक- 03 मोतीपुर में भरे-पुरे परिवार के साथ रहने वाली सुशीला बाई खोब्रागड़े एक संघर्षशील महिला है, सुशीला बाई के पति राजेश शहर की एक कबाड़ी की दुकान मंे मजदूरी कर के अपनी जीवन की गृहस्थी को चला रहे हैं। जिनके लिये स्वयं का आवास सपने से कम नहीं था, किन्तु आवास योजना का लाभ लेकर ये सर्व सुविधायुक्त पक्के मकान में निवासकर सुशीला बाई शासन को करबद्ध धन्यवाद प्रस्तुत करती है।
इसी प्रकार श्रीमती सूर्यकांता बताती हैं कि वो अपने बच्चो को पाल (कपडे की दीवार ) लगे घर के अंदर सुलाकर स्वयं घर के बाहर खुले मौसम में सोती थी। 397 डी.पी.आर. में नाम आने के उपरांत धीरे-धीरे अपनी कल्पना को आवास का रूप देने लगी और एक सर्वसुविधा युक्त सुन्दर घर अपने बेटे दामाद के सहयोग से तैयार कर दो लडकी और एक लडके के परिवार के साथ रहते हुए निगम प्रशासन व शासन को धन्यवाद करती है।
महापौर श्रीमती हेमा सुदेश देशमुख ने कहा कि महिला उत्थान एवं महिला नेतृत्व को सम्बल प्रदान करने में आवास योजना का महत्वपूर्ण योगदान है। छत्तीसगढ सरकार की योजना का लाभ लेकर महिलाये आज आत्मनिर्भर हो रही है। उन्होंने कहा कि मोर जमीन मोर मकान योजना का नगर निगम द्वारा सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है,जिसके माध्यम से हितग्राही अपने आशियानें को सजाकर हमर मयारू राजनांदगांव को सवारने का कार्य कर रहे है।
वर्तमान में मोर मकान मोर आस योजनांतर्गत वर्षो से किराये में निवासरत परिवारों को स्वयं का आवास उपलब्ध कराने निगम द्वारा प्रक्रिया कर आबंटन की जा रही है। प्रथम चरण में 14 हितग्राही योजना का लाभ लिये और शेष हितग्राहियो को लाभ देने प्रक्रिया की जा रही है।
निगम आयुक्त डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी के कहा कि शासन के सहयोग से गरीब एवं जरूरतमंद परिवार जो वर्षो से अपने कच्चे घरो में मौसम की मार को सहते हुए मरम्मत कराकर उन्हें रहना पड़ता था ऐसे परिवारो को एक मजबूत सर्वसुविधायुक्त आवास निर्माण करने के लिये स्तरबद्ध भुगतान सीधे हितग्राहियों के खाते में कर के मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग प्रदान किया है।
जिसमें महिलाओं की महती भूमिका निभाते हुये, आवास योजना का लाभ लिये। वर्तमान में मोर मकान मोर आस योजनांतर्गत निगम सीमाक्षेत्र में निर्मित एंव निर्माणाधीन आवासों में प्रति आवास की दर से लागत मूल्य पर किराये के मकान में निवासरत पात्र हितग्राही भी स्वंय के आवास का सपना सकार कर रहेे है।









































