राजनांदगांव : एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना एवं जिला बाल संरक्षण इकाई महिला एवं बाल विकास विभाग राजनांदगांव के संयुक्त प्रयासों से जिले में एक और बाल विवाह पर लगा विराम…

राजनांदगांव 12 मई 2021। महिला एवं विकास विभाग राजनांदगांव द्वारा जिले में बाल विवाह रोकथाम एवं फॉलोअप हेतु विकासखंडवार ड्यूटी लगायी गयी है। जिसके तहत् श्री संतोष केंवट परामर्शदाता जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा शहरी परियोजना राजनांदगांव में बाल विवाह की स्थिति के फॉलोअप के दौरान 11 मई 2021 को मोबाईल फोन के माध्यम से ज्ञात हुआ कि राजनांदगांव शहर के एक वार्ड की लड़की का बाल विवाह होने वाला है।

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इसकी सूचना जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती रेणु प्रकाश को होते ही बाल विवाह रोके जाने हेतु त्वरित टीम को मौके पर रवाना किया गया। मौके पर राजनांदगांव शहरी परियोजना अधिकारी सह बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी सुश्री रीना ठाकुर एवं पर्यवेक्षक शहरी परियोजना राजनांदगांव सुश्री दिव्या तिवारी  तथा जिला बाल संरक्षण इकाई महिला एवं बाल विकास विभाग राजनांदगांव से संतोष केंवट परामर्शदाता एवं श्री पुरूषोत्तम सिदारआउटरिच वर्कर वधु पक्ष के घर पहुॅचकर बाल विवाह का जायजा लिया गया।

जिसमें स्थानीय लोगों ने बताया कि वार्ड एक बालिका का डोंगरगढ़ के एक ग्राम के नाबालिग लड़के से बाल विवाह होने जा रहा है। बाल विवाह रोकथाम दल का नेतृत्व करते हुये सुश्री रीना ठाकुर द्वारा वधु पक्ष एवं मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों से अवगत कराते हुए वधु पक्ष को बाल विवाह नहीं करने हेतु राजी कर लिया गया एवं पंचनामा तैयार किया गया।

इसके अलावा इस टीम के द्वारा परियोजना डोंगरगढ़ के बाल विवाह रोकथाम दल को सूचना देते हुये वर पक्ष को समझाईश देने तथा बाल विवाह रोकथाम करने हेतु कहा गया।

जिला बाल संरक्षण इकाई, महिला एवं बाल विकास विभाग राजनांदगांव की सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती गीताजंली नेताम एवं  पर्यवेक्षक डोंगरगढ़ श्रीमती मृदुभाषिणी उके द्वारा संबंधित ग्राम के सरपंच और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से दूरभाष पर समन्वय कर पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति को वर पक्ष के यहां भेज कर समिति के अध्यक्ष सह सरपंच द्वारा बाल विवाह नहीं करने हेतु वर पक्ष को समझाईश देते हुये पंचनामा तैयार कर रोका गया।

सरपंच की सक्रियता एवं सूजबूझ तथा पंचायत प्रमुख होने के नाते अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए बाल विवाह रोकने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग राजनांदगांव द्वारा बधाई देते हुए जिले के समस्त सरपंचों, वार्ड पंचों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, पटेल, कोटवार तथा स्थानीय लोगों को आगे आकर बाल विवाह रोकथाम करने की अपील की गई है।

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रमुख प्रावधान  –
इस अधिनियम के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के लड़कियों तथा 21 वर्ष से कम उम्र के लड़कों का विवाह बाल विवाह माना गया है। इस अधिनियम के अंतर्गत बाल विवाह किया जाना दंडनीय अपराध माना गया है। एक व्यस्क पुरूष का विवाह किसी 18 वर्ष से कम उम्र आयु की लड़की के साथ बाल विवाह संपन्न होने पर बाल विवाह करने वाले व्यस्क पुरूष तथा बाल विवाह संपन्न कराने वालों को 2 वर्ष का कठोर करावास या 1 लाख का जुर्माना या दोनों सजा से दंडित किया जा सकता है।

इस अधिनियम के तहत किये गये अपराध संज्ञेय और गैर जमानती है। इस अधिनियम के अंतर्गत अव्यस्क बालकों के विवाह को अमान्य करने का भी प्रावधान है।