राजनांदगांव: चरक जयंती के अवसर आयुष पॉलीक्लीनिक में की गई नि:शुल्क हड्डी घनत्व जांच, स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोपरि…

राजनांदगांव 16 अगस्त 2021। चरक जयंती के अवसर पर जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. रमाकांत शर्मा के निर्देशन में प्रभारी आयुष पॉलिक्लीनिक डॉ. प्रज्ञा सक्सेना द्वारा नि:शुल्क हड्डी घनत्व जॉच का आयोजन किया गया। शिविर में 101 लोगों की जॉच हुई, जिसके आधार पर 27 लोग सामान्य, 54 लोगों में ऑस्टियोपीनिया व 19 लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस पाया गया।

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शिविर में ऑस्टियोपोरोसिस व ऑस्टियोपीनिया के विषय में जीवन शैली आहार – विहार व अन्य जानकारी दी गई तथा नि:शुल्क औषधियों के साथ पाम्पलेट का वितरण किया गया।

आचार्य चरक आयुर्वेद के प्रसिद्ध आयुर्वेद ग्रंथ चरक संहिता के रचयिता हैं। 300 से 200 ई0 पूर्व आयुर्वेद के आचार्य चरक की गणना भारतीय औषधि विज्ञान के मूल प्रवर्तकों में होती है। चरक संहिता में आयुर्वेद का प्रयोजन -स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं। आतुरस्य विकार प्रशमनं च का उल्लेख है। जिसका अर्थ स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी व्यक्ति के रोग को दूर करना है। सभी लोगों को सर्वप्रथम अपने शरीर की रक्षा करनी चाहिए।

शरीर के स्वस्थ रहने पर ही अन्य सभी कार्य संभव है। चरक संहिता में सद्वृत्त का पालन व आचार रसायन की बात बताई गई है। जिसमें ये स्पष्ट किया गया है कि रोगों का नाश व युवा बने रहने के लिए केवल औषधियां सेवन ही नहीं, आचरण, व्यवहार, विचार भी आवश्यक है। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डी के घनत्व में कमी आ जाती है जिससे हड्डियॉ अधिक नाजुक हो जाती हैं और उनके टूटने की संभावना अधिक हो जाती है। ये अल्प कैल्शियम आहार, उम्र, रजोनिवृत्ति, हार्मोन असंतुलन, शराब, धुम्रपान, पारिवारिक पृष्ठभूमि व कुछ दवाओं के सेवन के कारण होता है।

इससे बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम तथा विटामिन डी का सेवन, कैल्शियम के अच्छे स्त्रोत दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम, मेथी, चुकन्दर, रागी, मछली, अण्डा का सेवन करना चाहिए तथा विटामिन डी हेतु सप्ताह में दो से तीन बार 15 मिनट के लिए रोशनी में बैठना चाहिए।

हल्का व्यायाम दिन में 15 से 20 मिनट पैदल चलना चाहिए। शिविर में डॉ. प्रज्ञा सक्सेना, डॉ. स्नेह गुप्ता, डॉ. भारती यादव, फार्मासिस्ट (आयुष) श्रीमती अनुसुईया साहू, श्रीमती दामिनी चुनारकर ने अपनी सेवाएं प्रदान की। श्रीमती सुनीता देवांगन, श्रीमती रमा देवांगन, श्रीमती किरन, चेतन नामदेव, गणेश गुप्ता का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।