
राजनांदगांव – सफलता का शंखनाद हमेशा प्रीमियम श्रेणी की सुविधाओं वाले वातावरण से ही नही होता, यह प्रतिभा से भरे गहरी इच्छाशक्ति वाले व्यक्तित्व पर सवार संघर्षों की तंग गलियों से भी अपना आकार लेती है, सीमित सुविधाओं के साथ बड़ी सफलता का कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है डोंगरगढ़ की बेटी जयश्री ऊइके ने। जयश्री ने आईआईटी एडवांस क्रैक कर आईआईटी भुनेश्वर में चयनित होकर विपरीत परिस्थिति में सफलता का एक नई इबारत लिखी है।

अक्सर माना जाता है कि इस परीक्षा के लिए प्रीमियम क्लास की कोचिंग सहित बेहतर सुविधाएं मुहैया होनी चाहिए परंतु डोंगरगढ़ की जयश्री ने बिना किसी कोचिंग के अपने पहले प्रयास में ही सफल होकर न केवल अपनी सुनहरे भविष्य की राह आसान की है बल्कि छोटे शहरों में रहनेवाले सुविधाहीन छात्रों के लिए भी एक नया जज्बा कायम किया है। शासकीय पूर्व मा. विद्यालय कांड्रापारा डोंगरगढ़ में प्रभारी प्रधान पाठक के रूप में पदस्थ वार्ड नंबर 23 डीपरापारा, डोंगरगढ़ निवासी सीताराम जी और उनकी पत्नी सत्यभामा जी जो की ग्रहणी है के घर यह यह पहला मौका नही है, इसके पूर्व ऐसी ही परिस्थिति में 2020 में जयश्री की बड़ी बहन वीणा ने भी पहले ही प्रयास में NEET क्रैक कर मेडिकल कॉलेज रायपुर के लिए अपनी एमबीबीएस की राह बनाई थी।
डोंगरगढ़ की दोनो ही बेटियां सरस्वती स्कूल डोंगरगढ़ की हिंदी मीडियम की छात्रा रही हैं . 8 वी कक्षा के बाद प्रयास बालिका आवासीय विद्यालय रायपुर से जयश्री ने से 12वी तक का अपना सफर पूरा किया, दोनों बेटियों के पिता सीताराम जी भी कम संघर्षो ने नहीं गुजरे है, सीताराम जी का पारिवारिक वातावरण पूर्णतः नॉन एकेडमिक रहा और घर की जीविका विषम परिस्थिति में चला करती थी, उन विपरीत माहौल में सीताराम अपना पोस्ट ग्रेजुएशन पुर्ण कर शिक्षक बने थे और अपनी बेटियों को जीवन स्तर बदलने का एक प्लेटफार्म प्रदान किया था।
बेटियां उनके संघर्षों को जेहन में संभाले पूरे मनोयोग से सफलता की नई इबारत लिखने के लिए जुटी होती थी और अन्ततः यह कारनामा उन्होंने कर दिखाया. जयश्री की सफलता पर उनके पिता सीताराम ऊईके के मित्रो अजय बाजपेई, सतीश यादव सहित सरस्वती स्कूल के प्राचार्य प्रकाश यादव जी और पूरे स्टाफ ने अपनी शुभकामनाएं दी।









































