
0 घोटालों और कांड के लिए चर्चित रही भाजपा सरकार, वायदा खिलाफी इनकी फितरत है
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग अध्यक्ष जितेंद्र मुदलियार ने जारी बयान में कहा कि – मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने 15 सालों के कुशासन से प्रदेश को उबारा है। रोजगार, आर्थिक व महिला सशक्तिकरण, सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। उन्होंने डॉ. रमन सिंह के दावों को गलत ठहराते हुए कहा कि – विपक्ष के वयोवृद्ध नेता जनता को भ्रमित करने की कोशिशों में जुटे हैं। वे जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में असफल हुए हैं, उन्हें यह स्वीकार कर लेना चाहिए।
युवा आयोग अध्यक्ष मुदलियार आरोप लगाया कि – डॉ. रमन सिंह विधायक होने का उत्तर दायित्व नहीं निभा सके। आज भी वे यहां निष्क्रिय हैं। क्षेत्र की जनता उन्हें ढूंढती है। वे गाहे-बेगाहे यहां नज़र आते हैं और उस दौरान भी लोगों का उनसे मिल पाना मुश्किल होता है। क्षेत्र की जनता अपनी समस्याएं लेकर कहां जाए.. जब उनका नेतृत्वकर्ता ही वहां मौजूद न हो।
उन्होंने कहा – मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पाटन का विधायक होने नाते वहां विकास को नया आयाम दिया। इसकी तुलना में डॉ. रमन सिंह 15 वर्षों में राजनांदगांव को कुछ नहीं दे पाए। वे जिन कार्यों को अपनी उपलब्धियां बताते हैं वे आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे और अफसरशाही के भरोसे चलने वाली सरकार के कुशासन का नमूना है।
मुदलियार ने आरोप लगाया कि – डॉ. रमन सिंह ने बगैर लोगों की आवश्यकता समझे, उनकी समस्याओं के समुचित निदान को नज़र अंदाज करते हुए मनमाने तरीके से बगैर किसी योजना के कार्य किया जिसका खामियाजा शहर और राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के लोग भुगत रहे हैं। इनकी ही सरकार में दिग्विजय स्टेडियम की दुर्दशा कर दी गई। शहर में फ्लाई ओवर का निर्माण कर इसे दो हिस्सों में बांट दिया गया। मातृ-शिशु अस्पताल जैसी ईमारतों के निर्माण में भारी कोताही बरती गई। नतीजा यह है कि यहां ड्रेनेज सिस्टम खराब होने के कारण बारह महिनों परेशान होना पड़ता है।
मुदलियार ने डॉ. रमन सिंह को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि – राजनांदगांव के विधायक कर्तव्यविमुख हो गए और सत्ता सुख में उन्होंने अपनी कर्मभूमि से छल ही किया। उनके ही कार्यकाल में विधानसभा क्षेत्र में बनी सड़कें टिक भी नहीं पाई। भाजपा कार्यकाल में निर्मित मोहारा का ब्रिज बारिश में बह गया। आवागमन की सुगतमा मुहाल हो गई। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा ये भी कि एक ही सड़क को दो बार बनाया गया। क्षेत्र की कई मांगों पर आज तक सुनवाई नहीं हुई।
किसानों की आत्महत्या का दोषी बताते हुए मुदलियार ने कहा – डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्री रहते और उनके पुत्र अभिषेक सिंह के संसदीय कार्यकाल में राजनांदगांव जिले में सर्वाधिक किसान आत्महत्या करने मजबूर हुए और अपनी ईहलीला समाप्त कर ली। यहां तक कि उनके कार्यकाल में सिंचाई को लेकर एक भी बड़ी योजना जिले को हासिल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि असलियत यह है कि, उनकी सरकार ने हमेशा वायदा खिलाफी ही की है। किसानों को बोनस उन्होंने नहीं दिया, बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिला, उद्योगों की स्थापना नहीं हुई, आर्थिक व महिला सशक्तिकरण की दिशा में कोई काम नहीं हुआ। अलबत्ता सरकार के घोटाले और कांड जरुर चर्चित हुए।
भूपेश सरकार की योजनाओं पर बात करते हुए मुदलियार ने बताया कि – कि डॉ. रमन सिंह उस गौठान व गोधन न्याय योजनाओं पर बेबुनियाद दावे कर रहे हैं जिसके सहारे आज गौपालक अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं, यह योजना उनके लिए संजीवनी साबित हुई है।
इससे गौ पालन को बढ़ावा मिला है और गो सेवा हो रही है। जबकि भाजपा के कार्यकाल में गौशालाओं में सैकड़ों गायें भूख से मर जाया करती थी। भूपेश सरकार की न्याय योजना पर भाजपा चुप्पी साध लेती है। इसका कारण है कि डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में आत्महत्या के लिए मजबूर किसानों को कांग्रेस सरकार में असल अधिकार मिला है।
प्रदेश के लाखों किसान आज आर्थिक रुप से संपन्न और सक्षम है। कृषि के क्षेत्र में भूपेश सरकार ने क्रांतिकारी योजनाओं को लागू किया है। फसलों का पूरा दाम कृषकों को मिल रहा है। कृषि मजदूरों को फायदा मिल रहा है।
उन्होंने मौजूदा सरकार के कामों पर कहा कि – बेरोजगार युवाओं को भूपेश सरकार न केवल 25 सौ रुपए प्रतिमाह भत्ता दे रही है बल्कि उनके कौशल विकास के लिए प्रयास कर उन्हें रोजगार भी उपलब्ध करवा रही है। युवाओं के लिए ही राजीव युवा मितान क्लब योजना शुरु की गई है जिससे जुड़कर युवा गांव-गांव में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुख्यमंत्री हाट बाज़ार क्लिनिक योजना, मुख्यमंत्री दाई-दीदी क्लीनिक की सौगात कारगर साबित हो रही है। लाखों लोगों को इसका फायदा मिल रहा है।
मुदलियार ने आरोप लगाया कि – अपने लोक-लुभावने वायदों से डॉ. रमन सिंह और उनकी सरकार प्रदेश को छलती ही रही। हर बार वे अपने वायदों से मुकर गए। उन्होंने प्रदेश के मजबूत स्तंभों को कमजोर ही किया। इस लिहाज से वे किसी तौर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार पर सवाल उठाने के अधिकारी नहीं है।
अलबत्ता उन्हें अपने क्षेत्र की जनता को जवाब देना होगा कि 15 वर्षों में भी वे क्यूं कभी उनके बीच नहीं रहे। क्यूं उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। क्यूं उनके निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य नागरिक अपने विधायक से नहीं मिल पाता और क्यूं वे अपने कर्तव्यों के प्रति विमुख हैं।









































