राजनांदगांव: तालाब टैंक में डूबने से मौत, वृद्ध पिता को मिलेगा 4 लाख का मुआवजा…

तालाब(डबरी) टैंक में डूबने से मौत, वृद्ध पिता को मिलेगा 4 लाख का मुआवजा.

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डोंगरगढ़ – तालाब (डबरी) में डूबने से मौत के मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए मृतक के पिता को तीन माह के भीतर चार लाख मुआवजा दिलाने का आदेश दिया है।
मामला उस समय का है जब याचिकाकर्ता के पुत्र सुरेश मंडावी की तालाब (डबरी) में डूबने से मौत हो गई थी। घटना की जानकारी पुलिस को मिलने पर मर्ग कायम किया गया, जांच की गई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि युवक की मृत्यु पानी में डूबने से हुई थी।
मुआवज़ा आवेदन पेश किया गया. तहसीलदार और एसडीओ ने मृतक के पिता को चार लाख रुपये मुआवज़ा दिए जाने की अनुशंसा भी की थी, लेकिन बाद में आवेदन को जिला कलेक्टर द्वारा मिर्गी होने का कारण मानते हुए मुआवज़ा खारिज कर दिया।
इसके पश्चात उच्च न्यायालय अधिवक्ता विवेक महोबिया ने उक्त प्रकरण को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर में संस्थित किया, जिसकी सुनवाई एकल पीठ के माननीय न्यायाधिपति जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने की। अधिवक्ता पराग कोटेचा ने अपने तर्क के दौरान कहा कि उक्त घटना के दौरान कोई प्रत्यक्ष साक्षी मौजूद नहीं था। न्यायालय द्वारा संपूर्ण परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए आवेदक को तीन माह के भीतर चार लाख रुपए देने का आदेश पारित किया गया। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि घटना के समय कोई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि युवक की मौत तालाब तालाब(डबरी) में डूबने से हुई।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन माह के भीतर राशि अदा की जाए।
माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने एक प्रकरण में निर्णय पारित करते हुए संबंधित प्राधिकरणों को निर्देशित किया है कि मृतक सुरेश मंडावी के पिता याचिकाकर्ता को चार लाख की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाए। मामला यह है कि एक व्यक्ति (सुरेश मंडावी) की मृत्यु तालाब (डबरी) में डूबने से हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक की मृत्यु डूबने से हुई थी, जिससे श्वसन नली अवरुद्ध हो गई थी। न्यायालय ने तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए आदेश दिया कि संबंधित अधिकारी मृतक के पिता (याचिकाकर्ता) को छत्तीसगढ़ रेवेन्यू बुक सर्कुलर की धारा 6 (4) के तहत 4 लाख रुपये का मुआवजा तीन महीने के भीतर अदा करें, यह समय सीमा प्रमाणित प्रस्तुत करने के दिन से मानी जाएगी।