
देवी अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में नगर निगम में उनकी जीवनी पर प्रदर्शनी एवं संगोष्ठी का आयोजन

अहिल्या बाई होल्कर की जीवनी का प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रदर्शन तथा पत्रिका का वितरण
राजनांदगांव 28 मई। देवी अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मंत्रायल रायपुर द्वारा विभिन्न अयोजन करने के निर्देश प्राप्त हुए थे। निर्देश के अनुक्रम में आज नगर निगम के सभागृह में महिलाओं की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के तहत अहिल्या बाई होल्कर की जीवनी पर प्रदर्शनी लगाकर संगोष्ठी आयोजित की गई। निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा ने जयंती मनाने शासन के दिशा निर्देश की जानकारी दिये, वही ग्रामीण बैक के सेवानिवृत्त प्रबंधक श्री अमोद श्रीवास्तव ने उनकी जीवनी पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रोजेक्टर के माध्यम से होल्कर जी की जीवन गाथा का चित्रण दिखाया गया तथा उनकी जीवनी संबंधी पत्रिका वितरित की गयी।
आयुक्त श्री विश्वकर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देवी अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में राज्य शासन द्वारा 21 मई से 31 मई के बीच विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश प्राप्त हुए है, जिसके तहत महिला सशक्तिकरण के लिए उनके जीवन वृतांत को जन जन तक पहुचाने संगोष्ठी, चित्र प्रदर्शनी, उत्कृष्ठ कार्य करने वाले स्वच्छता दीदीयों का सम्मान के अलावा आम गृहणियों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए ऐतिहासिक,
पुरातात्विक तथा धार्मिक महत्व के स्थानो एवं शैक्षणिक संस्थानो तथा जल स्त्रोंत जैसे तालाब, कुॅआ, हैण्ड पंप के आस पास, श्रमदान कर सफाई अभियन चलाना तथा स्वच्छता दीदीयो का स्वास्थ्य परीक्षण कराना है। उन्हांेने कहा कि इसी कडी मंे आज देवी अहिल्या बाई की जीवनी पर प्रदर्शनी एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया है जिसमें उन्होंने महिलाओं के लिए जो विशेष कर कार्य किए है उन्हें बताया जाएगा।

ग्रामीण बैक के सेवानिवृत्त प्रबंधक श्री अमोद श्रीवास्तव ने संगोष्ठी में उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवी अहिल्या बाई होल्कर का जीवन संघर्षो से भरा रहा, उनकी शादी के कुछ साल बाद ही 1754 में उनके पति श्री खाडे राव का युद्ध के दौरान निधन हो गया और लगभग 10 वर्ष के अंतराल में उनके ससुर तथा उनका एक मात्र बेटा भी चल बसे, जिसके पश्चात देवी अहिल्या बाई 11 दिसम्बर 1767 को इंदौर की शासक बनी।
उन्होंने बताया कि जीवन में संघर्ष के बाद भी रानी ने कुशलतापूर्वक राजकाज संभाल लिया और कुशल कुटनीति के दम पर विरोधियों को परास्त कर जीवन पर्यन्त सामाजिक एवं धार्मिक कार्यो मे जुटी रही। उन्होंने देशभर के प्रसिद्ध क्षतिग्रस्त मंदिरो का पुर्नर निर्माण कर तीर्थ स्थलो पर मंदिर, घाट, कुॅआ और बावली का निर्माण कराया। साथ ही कुशल प्रशासक बन सड़कांे का निर्माण करवाया, अन्न क्षेत्र खुलवाए, प्याऊ बनवाए, मंदिरों में विदवानों की नियुक्ति किए।
श्री श्रीवास्तव ने संगोष्ठी में कहा कि देवी अहिल्या बाई ने समाज सुधार की दिशा में किसानों का लगान कम कर समाज के हर वर्ग की भलाई के लिए कार्य किए। राजमाता ने चोरो और डाकुओ को सही रास्ते में लाकर उनके जीवन में परिवर्तन लाया। उनके शासन काल में गांव में पंचायत, कोतवाल, पुलिस एवं न्यायालय की स्थापना हुई। कला एवं साहित्य क्षेत्र मंे भी उनका अमूल्य योगदान रहा। कृषि सुधार के साथ साथ जन-जाति, समाज के उत्थान एवं आर्थिक सुधार के लिए उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। महिला सशक्तिकरण की दिशा में उन्हांेने विधवा विवाह, महिला शिक्षा एवं महिलाओं को समान अधिकार एवं सम्मान के लिए अनेक कदम उठाए।
संगोष्ठी के पश्चात महिला समूह एवं स्वच्छता दीदीयों ने अहिल्या बाई के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। महिलाओ को उनके जीवनी पर प्रकाशित पत्रिका वितरित की गयी। कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता श्री संजीव मिश्रा ने किया। इस अवसर पर कार्यपालन अभियंता श्री संजय वर्मा ंसहित महिला समूह एवं स्वच्छता दीदी तथा निगम के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।









































