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राजनांदगांव: नाम से मतलब नहीं तो बदले क्यों गांधी का नाम – ऋषि शास्त्री…

➡️ मनरेगा पर बयान को लेकर गरमाई सियासत कांग्रेस का भाजपा पर तीखा हमला

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राजनांदगांव। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक रमन सिंह के बयान काम से मतलब या नाम से? ने प्रदेश की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। इस बयान को कांग्रेस ने न केवल असंवेदनशील बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह टिप्पणी मजदूरों के अधिकारों और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की गरिमा दोनों पर सीधा प्रहार है।


कांग्रेस के युवा नेता एवं पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरते हुए कहा कि मनरेगा कोई सामान्य सरकारी योजना नहीं बल्कि करोड़ों ग्रामीण मजदूरों के लिए कानूनी रूप से सुनिश्चित रोजगार का अधिकार है, जिसे कांग्रेस सरकार ने संसद में कानून बनाकर लागू किया था। ऐसे में योजना के नाम पर सवाल उठाना गरीबों के अधिकारों पर सवाल उठाने जैसा है। श्री शास्त्री ने तीखा सवाल करते हुए कहा कि यदि भाजपा को सचमुच नाम से कोई मतलब नहीं है तो फिर संसद में मनरेगा का नाम बदलने की कोशिश क्यों की गई? आखिर महात्मा गांधी के नाम से भाजपा को इतनी असहजता क्यों है? उन्होंने इसे भाजपा की वैचारिक संकीर्णता का परिचायक बताया। उन्होंने आगे कहा कि एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा इस तरह की टिप्पणी लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक गरिमा के विपरीत है।

इससे न केवल देश के श्रमिक वर्ग का अपमान हुआ है, बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ऐतिहासिक और नैतिक विरासत को भी ठेस पहुंची है। उन्होंने ने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार मनरेगा को कमजोर करने की कोशिश करती रही है कभी बजट में कटौती कर कभी रोजगार के दिनों में कमी करके और अब योजना के नाम पर सवाल खड़े कर मजदूरों का मनोबल तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सब गरीब, मजदूर और ग्रामीण भारत पर सीधा हमला है।

श्री शास्त्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस मनरेगा और मजदूरों के अधिकारों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। यदि भाजपा ने इस योजना के मूल विचारों और इसके कानूनी स्वरूप पर हमला जारी रखा, तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक लोकतांत्रिक आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का नाम केवल एक पहचान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, श्रम की गरिमा और आत्मनिर्भर भारत के विचार का प्रतीक है।

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