
राजनांदगांव। अविभाजित जिले के चार लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को इस बार सितंबर के बिल में एपीपीएएस शुल्क का भी बड़ा झटका लगा है। दो माह तक राहत के बाद अब सितंबर के बिल में 7.10 फीसदी एपीपीएएस शुल्क भी लग रहा है। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का डबल झटका लग रहा है।

अब हर माह बिजली की कीमत तय होने के कारण हर माह शुल्क में आमतौर पर इजाफा हो जाता है। एक तो अगस्त से बिजली बिल हॉफ योजना में 400 यूनिट तक बिल हॉफ को कम करके सौ यूनिट कर दिया गया है। ऐसे में 400 यूनिट की खपत पर हजार रुपए ज्यादा बिल देना पड़ रहा है। इसी के साथ जुलाई के लिए जो एफपीपीएएस तय किया गया है, उसके कारण भी चार सौ यूनिट की खपत में करीब डेढ़ सौ रुपए ज्यादा देने पड़ रहे हैं। ऐसे में 400 यूनिट की खपत पर इस बार 12 सौ रुपए ज्यादा देने पड़ रहे हैं।
प्रदेश में अब तक बिजली उपभोक्ताओं से वीसीए के स्थान पर उत्पादन लागत के अंतर की राशि को उपभोक्ताओं से वसूलने के लिए नया फार्मूला फ्यूल पॉवर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) लागू है। सबसे पहले 2023 के अप्रैल में पहली बार नया फार्मूला लागू किया गया। बीते दो साल से उपभोक्ताओं को एफपीपीएएस शुल्क के नाम से हर माह झटका ही लगता रहा है। पहली बार यह झटका इस साल अप्रैल के बिल में नहीं लगा था।
प्रदेश भर के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को बीते छह साल से 400 यूनिट की खपत पर बिजली बिल आधा देना पड़ रहा था। इसमें ऊर्जा प्रभार के साथ एफपीपीएएस शुल्क आधा लगता था तो हजार रुपए से एक हजार 50 रुपए तक बिल में कम हो जाता था। लेकिन अब अगस्त से बिजली बिल हॉफ की सीमा को सौ यूनिट कर दिया गया है तो 400 यूनिट की खपत करने वालों को हजार रुपए ज्यादा देने पड़ रहे हैं। सौ यूनिट से ज्यादा खपत होने पर सौ यूनिट पर भी हॉफ योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इस बार उपभोक्ताओं का जो बिल आ रहा है, वह बीते माह से करीब-करीब डबल हो गया है। जिनका बिल पहले छह सौ रुपए आता था, उनका बिल अब 12 सौ रुपए और 12 सौ रुपए वालों का करीब 24 सौ रुपए आ रहा है।









































