राजनांदगॉव : आदिवासी समाज की विदुषी महिला पर आक्षेप दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण – मधुसूदन यादव…

आरक्षण और लंबित सरकारी भर्तियो के मुद्दे पर प्राप्त विफलता को बीजेपी पर थोपने का प्रयास कर रहे हैं मुख्यमंत्री: मधुसूदन यादव

सुनियोजित साजिश के तहत आरक्षण का पेंच फॅसा कर युवाओं को सरकारी भर्तियों से वंचित रखने का प्रयास कर रहे हैं मुख्यमंत्री: मधुसूदन यादव

राजनांदगॉव – पूर्व सांसद राजनांदगॉव मधूसूदन यादव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा आरक्षण के मुद्दे पर दिये गये उनके बयान पर पलटवार करते हुए उनके बयान को कांग्रेस सरकार के चार साल के शासन  में आरक्षण और लंबित सरकारी भर्तियो केे मुद्दे पर प्राप्त विफलता को छुपाने और बीजेपी के उपर थोपने का कुत्सित प्रयास बताया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरक्षण के मुद्दे पर राजभवन पर निशाना साधते हुए कहा था कि राजभवन बीजेपी के हाथों में खेल रहा है और हमारे युवाओं भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है

जिसपर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष मधुसूदन यादव ने सख्त आपत्ति जताते हुए कहा है कि राज्यपाल एक बुद्धिजीवी, न्यायप्रिय एवं संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप विधिसम्मत कार्य करने वाली आदिवासी वर्ग की विदुषी महिला हैं, जो संविधान के तहत कार्य करने के लिये संकल्पित हैं और केवल अपने पदीय दायित्वों का पूरी निष्ठा से संपादन कर रही हैं, जिसे राजनैतिक चश्मे से देखना अशोभनीय है।

भूपेश नीत कांग्रेस शासन द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय से पारित आरक्षण संबंधी पूर्व आदेशों की अवमानना ना होने पाये और किसी एक जाति वर्ग को आरक्षण प्रतिशत में वृद्धि का लाभ देने के प्रयास में किसी दूसरे जाति वर्ग के आरक्षण प्रतिशत में कमी होने से किसी को वंचित ना होना पड़े, यह हम सब की चिन्ता का विषय है। पूरे छत्तीसगढ़ की जनता अपने मुख्यमंत्री से यह जानना चाहती है कि जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किसी राज्य में आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित कर दी गयी है

और छ.ग. राज्य में जब माननीय उच्च न्यायालय ने पूर्व में एक बार 58 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के शासन के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देकर अस्वीकृत कर दिया है तो फिर कांग्रेस सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में 76 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव लागू किया जाना किस प्रकार संभव होगा ? यदि राज्यपाल इस बिल पर सहमति जता देती हैं तो भी माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्धारित आरक्षण प्रतिशत से अधिक आरक्षण प्रतिशत होने की वजह से यह कानून छत्तीसगढ़ में लागू करने में मुश्किल होने की आशंका है होगा ,

जिसे कोई भी व्यक्ति आसानी से माननीय हाईकोर्ट मंे चुनौती देकर इसपर आसानी से स्टे हासिल करके इसे राज्य में लागू होने से रोक सकता है। भाजपा नेता मधुसूदन ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया है कि उनकी नीयत में खोट हैं और वह प्रदेश में आरक्षण लागू करने के प्रति संवेदनशील नहीं हैं, उल्टे सुनियोजित साजिश के तहत आरक्षण का पेंच फॅसा कर युवाओं को सरकारी भर्तियों से वंचित रखने का प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि सरकार की वित्तीय स्थिति काफी नाजुक है वो अपना स्थापना व्यय बढ़ाना नहीं चाहती।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भाजपा को ढाल बनाकर अपनी नैतिक जिम्मेदारी ने बचने और आगामी चुनाव तक समय व्यर्थ करने की जुगत लगा रहे हैं । कांग्रेस पार्टी अनाप शनाप घोषणाएॅ करके तात्कालिक लाभ तो ले लेती है पर उन्हें दीर्घकालिक अवधि के लिये लागू करना उनके उनके लिये संभव नहीं होता है। प्रदेश की भोली भाली जनता को विगत चार साल से कांग्रेस पार्टी लगातार ठगते आ रही हैं, चाहे वह वर्तमान आरक्षण का मुद्दा हो या फिर प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी, युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने का, अनियमित एवं संविदा कर्मचारियों के नियमतिकरण का, ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने का या कोई अन्य मुद्दा।

श्री यादव ने यह भी पूछा है कि जब कांग्रेस पार्टी अपने घोषणापत्र में वादा करके चार साल से लाखो युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने से वंचित रख रही है और आरक्षण की आड़ में लंबित सरकारी भर्तीयों को टाल रही है, तब युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं हो रहा है और जब राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना ना हो

और प्रदेश में आरक्षण लागू करने की प्रक्रीया में किसी जाति वर्ग के हितों की अनदेखी ना हो, अथवा भविष्य में उच्च न्यायालय में आरक्षण लागू करने की प्रक्रीया पर कोई आपत्ति ना उठे, इस बात की चिन्ता कर ली, तब युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किस तरह से हो गया यह माननीय मुख्यमंत्री जनता को बताने का कष्ट करें ।