राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ गौ आधारित चिकित्सा और स्वरोजगार को समर्पित राज्य स्तरीय चतुर्थ पंचगव्य चिकित्सा सम्मेलन का भव्य आयोजन…

छत्तीसगढ़ गौ आधारित चिकित्सा और स्वरोजगार को समर्पित राज्य स्तरीय चतुर्थ पंचगव्य चिकित्सा सम्मेलन का भव्य आयोजन*
राजनांदगांव में राज्य स्तरीय चतुर्थ पंचगव्य चिकित्सा सम्मेलन का अत्यंत भव्य और प्रेरणादायक आयोजन संपन्न हुआ। इस आयोजन में देशभर से गौसेवा, पंचगव्य चिकित्सा, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और ग्रामोद्योग से जुड़े अनेक प्रमुख विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता, गौभक्त एवं गौपालक सम्मिलित हुए। यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ सरकार एवं गौ सेवा आयोग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य था — पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणाली पंचगव्य चिकित्सा के वैज्ञानिक स्वरूप को व्यापक बनाना एवं गौ आधारित स्वरोजगार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार बनाना।


इस गौरवपूर्ण अवसर पर अल्वा चेयरमेन फाउंडेशन, नई दिल्ली के संस्थापक एवं प्रख्यात पंचगव्य उत्पादक डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री बिसेसर पटेल एवं गौसेवा के प्रेरणास्त्रोत गौ सेवा के गुरुजी से शिष्टाचार भेंट की तथा पंचगव्य नवाचारों और गौशाला आधारित सूक्ष्म उद्योगों को लेकर विस्तृत चर्चा की।


डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू की गोबर आधारित नवाचारों पर विशेष प्रस्तुति मे कहा की सम्मेलन के दौरान “गौवंश आधारित आत्मनिर्भर भारत” विषय पर केंद्रित एक विशेष सत्र को संबोधित किया। उन्होंने पंचगव्य आधारित स्वदेशी उत्पादों की एक प्रेरक प्रदर्शनी प्रस्तुत की, जिसमें यह बताया गया कि किस प्रकार गौमाता के गोबर और पंचगव्य से बने उत्पादों के माध्यम से पर्यावरण-संरक्षण, स्वास्थ्य-रक्षा और रोजगार-सृजन तीनों उद्देश्यों को एक साथ साधा जा सकता है।


प्रमुख उत्पाद जो प्रदर्शित किए गए: ईको-फ्रेंडली पेंट: प्राकृतिक और रासायन मुक्त पेंट जो पर्यावरण के साथ-साथ भवन स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। धूप व अगरबत्ती: गौ-गोबर से निर्मित सुगंधित, शुद्ध और रोगहर धूप व अगरबत्तियाँ। बायो-फर्टिलाइज़र: रासायनिक खादों का जैविक विकल्प, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है। गोबर ब्रिकेट्स: रसोई एवं औद्योगिक उपयोग के लिए एक टिकाऊ और सस्ता ईंधन विकल्प। हस्तशिल्प व सजावटी वस्तुएं: ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित धार्मिक व पारंपरिक उपयोग की वस्तुएं जो स्वावलंबन को बढ़ावा देती हैं।
गांवों और युवाओं के लिए रोजगार की अपार संभावनाओ पर डॉ. साहू ने अपने संबोधन में कहा,


“पंचगव्य उत्पादों के माध्यम से हम न केवल पर्यावरण और स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को भी मजबूती से बढ़ावा दे सकते हैं। गौ आधारित सूक्ष्म उद्योग आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का आधार बन सकते हैं।”
उन्होंने जानकारी दी कि अल्वा चेयरमेन फाउंडेशन द्वारा विभिन्न राज्यों में गौशाला आधारित इकाइयाँ स्थापित की गई हैं, जिनमें ईको प्रोडक्ट्स, जैविक खाद निर्माण और ग्रामीण महिला उद्यमिता को प्राथमिकता दी गई है। इन प्रयासों से सैकड़ों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।


सम्मेलन का उद्देश्य और भविष्य की दिशा पर विचार रखते होए सम्मेलन में पंचगव्य चिकित्सा के वैज्ञानिक आधार, आधुनिक अनुसंधान, आयुर्वेदिक चिकित्सा में एकीकरण, ग्रामोद्योग के रूप में संभावनाएँ, और सरकारी योजनाओं से समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने पंचगव्य चिकित्सा को भारत की समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण का अभिन्न अंग मानते हुए इसे मुख्यधारा में लाने की आवश्यकता पर बल दिया।सम्मेलन में यह भी स्पष्ट हुआ कि छत्तीसगढ़, अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा के साथ, गौ आधारित चिकित्सा, कृषि नवाचार एवं ग्राम विकास का राष्ट्रीय केंद्र बनने की पूरी क्षमता रखता है। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने छत्तीसगढ़ सरकार एवं गौ सेवा आयोग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की और इस दिशा में निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।