
राजनांदगांव। जिला कांग्रेस कमेटी संयुक्त महामंत्री राम साहू ने सरकार द्वारा शराब दुकानों में लेन. देन प्रक्रिया को पूरी तरह कैशलेस किए जाने की तैयारी को अवैध शराब की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए की जा रही एक गैर जरूरी व्यवस्था बताया है। राम साहू ने कहा कि शराब दुकान में नकद सिस्टम बंद होने से गरीब, मजदूर वर्ग अधिक प्रभावित होंगे। अधिकतर लोग स्मार्ट फोन नहीं चलाते। ऑनलाइन भुगतान सुविधा की जानकारी भी नहीं रखते। हेमाल, कुली कबाड़ी के काम करने वाले मजदूर वर्ग के लोग अधिकतर प्रतिदिन शराब का सेवन करते हैं। ऐसे लोग शराब दुकानों में जाएंगे तो उन्हें शराब नहीं मिलेगी और वे मजबूरी में कोचियों का सहारा लेंगे। अवैध शराब विक्रेता आन लाइन भुगतान कर बड़ी मात्रा में शराब इकट्ठा करेंगे तथा उसे अधिक दर पर अवैध रूप से बेचेंगे।
यही नहीं, ऑनलाइन भुगतान सुविधा शुरू होने से शराब दुकान के आसपास मौका परस्त लोग इसका फायदा उठाएंगे। जो लोग ऑनलाइन रूप से शराब खरीदने में असमर्थ होंगे उनसे अधिक राशि लेकर ऐसे लोग दुकानों से शराब खरीद कर उन्हें उपलब्ध कराएंगे। कहीं. कहीं ना कहीं इस व्यवस्था से आम जनता को अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा ऑनालाइन प्रक्रिया गृह कलेश को भी जन्म देगा। डिजिटल भुगतान से शराब में खर्च राशि की जानकारी परिवार के सदस्यों को होने पर लड़ाई. झगड़ा का कारण भी बनेगा। अमर अरूण ने कहा कि डिजिटल भुगतान से अनेक समस्याएं सामने आएगी।
गाँवों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्शन कमजोर रहता है। यूपीआई फेल होना, सर्वर डाउन होना आम समस्याएं है। गाँवों के अधिकतर लोग स्मार्ट फोन नहीं चलाते, छोटे दुकानदार कैश लेते हैं, लेकिन सरकारी सिस्टम में यह आसान नहीं होती। ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश लोग नकद लेनदेन करते हैं। उनके बैंक खाते में राशि नहीं होती। साथ ही कई बार ऑनलाइन भुगतान करने के बाद भी दुकानदार को पेमेंट रिसीव नहीं होने की बात सामने आती है। ऐसे ग्राहक को डबल भुगतान कर दोहरे नुकसान का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने इससे पूर्व राशन वितरण प्रणाली को बायोमेट्रिक पद्धति से शुरू कराया था।
जो काफी धीमी व पूरी तरह फेल साबित हुई। इसमें कई प्रकार की तकनीकी समस्याएं सामने आई। इसी प्रकार शराब दुकानों में भी कैशलेस सुविधा में काफी सारी खामिया आ सकती है। यदि सरकार शराब दुकानों का पूरी तरह डिजिटल भुगतान शुरू करना चाहती है तो इस सुविधा को पहले शहरी क्षेत्र के शराब दुकानों में शुरू किया जाए। जिससे माह भर के भीतर ही ऑनलाइन प्रक्रिया के सुविधा व असुविधाओं के बारे में पता चल सके। इसके पश्चात ही प्रदेश में शराब दुकानों को कैशलेस किया जाए।









































