
राजनांदगांव। दैनिक श्रमिक मोर्चा ने औद्योगिक अधिनियम 1948 समाप्त होने से पहले प्रदेश के दैनिक वेतनभोगी एवं संविदा कर्मचारियों के स्थाईकरण की मांग उठाई है। इस संबंध में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, विधि एवं विधायी मंत्री तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव को ज्ञापन सौंपा गया है।

मोर्चा के कार्यकारी प्रांत प्रमुख राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2016 और 2023 में औद्योगिक अधिनियम 1948 की धारा 61 और 63 के तहत स्थाईकरण योजना लागू की गई थी। इसी प्रकार राजस्थान सरकार ने वर्ष 2023 में बैक डोर एंट्री से कार्यरत दैनिक श्रमिकों और संविदा कर्मियों के लिए 5 वर्ष की समय सीमा निर्धारित कर स्थाईकरण लागू किया, जिसे वर्तमान सरकार ने घटाकर 2 वर्ष कर दिया है।
उन्होंने कहा कि जबलपुर हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2023 के अपने फैसले में बिना रिक्त पद और बिना नियुक्ति आदेश के कार्यरत दैनिक श्रमिकों के लिए औद्योगिक अधिनियम के तहत 240 दिन की सेवा पर स्थाईकरण योजना को उचित ठहराया है। मोर्चा ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ में भी “माता कौशल्या स्थाईकरण योजना” लागू कर श्रमायुक्त दर पर कार्यरत लगभग 36 हजार दैनिक श्रमिकों और पात्र हजारों संविदा कर्मचारियों को लाभ दिया जाए। इसके लिए अधिकतम एक वर्ष की समय सीमा तय की जाए।
राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए चार नए श्रम संहिता अप्रैल 2026 से लागू होने के बाद 1948 का कानून समाप्त हो जाएगा, जिससे उसके बाद स्थाईकरण योजना लागू करने में कठिनाई आ सकती है। उन्होंने मांग की कि बारीक समिति में 6 लाख अनियमित कर्मचारियों के 30 अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधियों को सदस्य बनाया जाए।
प्रांत प्रवक्ता सत्यम शुक्ला ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले वर्तमान वित्त मंत्री ओपी चौधरी का वह वीडियो काफी चर्चित रहा, जिसमें उन्होंने अन्य राज्यों में लागू स्थाईकरण योजनाओं की सराहना की थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में शिक्षाकर्मियों का पहले स्थाईकरण किया गया था, जिसके बाद उनका संविलियन हुआ था। उस समय 8 वर्ष की समय सीमा घटाकर 2 वर्ष कर सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा किया था।










































