
अक्षय तृतीया पर घरों में मंडप सजाकर उनकी शादी की जाती है। शहर में इस बार बड़ी संख्या में मिट्टी के बने गुड्डे और गुड़िया की बिक्री हुई। इसके अलावा मोर, मटका, कलश, चुनरी, माला जैसे सजावट के सामान भी लोग खरीदते नजर आए।
छत्तीसगढ़ का प्रमुख पर्व अक्षय तृतीया ‘अक्ती’ 10 मई को मनाई जाएगी। घर से लेकर मंगल भवन में शहनाई की गूंज सुनाई देगी। परंपरानुसार मंडप में गुड्डा-गुड्डी फेरे लेंगे। पर्व को लेकर बाजार में जबरदस्त रौनक है। सराफा बाजार से लेकर रेडीमेड व इलेक्ट्रानिक में धूम मची है। सजावटी सामान खरीदने बड़ों के साथ बच्चे भी खूब उत्साहित हैं। अक्षय तृतीया को छत्तीसगढ़ में अक्ती तिहार के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन गुड्डा-गुड्डी (पुतरा-पुतरी) विवाह रचाने राज्य की विशिष्ट परंपरा है। बिलासपुर में इसे लेकर उत्साह देखते बन रही है।
हिंदू धर्म में हर तीज त्योहार और व्रत का विशेष महत्व है। उन्हीं में से एक है अक्षय तृतीया का पर्व, जिसे बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पर्व को लेकर काफी दिनों से तैयारियां प्रारंभ हो जाती हैं। जिस परिवार में विवाह योग्य युवक-युवती होते हैं, उनका विवाह प्राय: अक्षय तृतीया के महामुहूर्त में ही संपन्न किया जाता है। यदि युवक-युवतियों का विवाह न हो तो उस परिवार के छोटे बच्चे अपने गुड्डा-गुड़िया का विवाह रचाकर खुशियां मनाते हैं।
बच्चों को संस्कारों की शिक्षा
राज्य की इस अनोखी एवं विशिष्ट परंपरा की खुशी देखते बनती है। बच्चों की खुशियों में परिवार के बड़े-बुजुर्ग भी शामिल होते हैं। पुतरा-पुतरी का नकली विवाह रचाने के जरिए बच्चों को छत्तीसगढ़ी संस्कृति में निभाए जाने वाले संस्कारों की जानकारी दी जाती है, ताकि बच्चे जब बड़े हो जाएं तो उन्हें पहले से संस्कारों की जानकारी हो।
इन संस्कारों में तालाब से चुलमाटी लाने की रस्म, तेल, हल्दी लगाने, सिर पर मौर-मुकुट बांधने, फेरे लेने, विदाई आदि रस्मों के बारे में सिखाया जाता है। इन दिनों शहर के गोलबाजार, बृहस्पति, तेलीपारा, मंगला, सरकंडा, रेलवे सहित पुराना बस स्टैंड में मिट्टी से बने गुड्डा-गुड़िया, सजावटी और विवाह रस्मों के सामान से गुलजार है।
50 से 200 रुपये जोड़ी में बिके गुड्डे-गुडिया
अक्षय तृतीया पर घरों में मंडप सजाकर उनकी शादी की जाती है। शहर में इस बार बड़ी संख्या में मिट्टी के बने गुड्डे और गुड़िया की बिक्री हुई। इसके अलावा मोर, मटका, कलश, चुनरी, माला जैसे सजावट के सामान भी लोग खरीदते नजर आए। जो काफी आकर्षक व दिखने में बेहद खूबसूरत लग रहे थे।
इन गुड्डा-गुड़िया की कीमत भी काफी कम था। 50 रुपये से लेकर 200 रुपये में बड़ी आसानी से मिल गए। मटका कलश का दाम 50 रुपये जोड़ी था। मोर का दाम 20 रुपये, वहीं चुनरी का दाम 10- 20 रुपये था। बाजार में विवाह पूजन का अलग से सेट भी उपलब्ध था। गुरुवार को बाजार में भीड़ देखते बन रही थी। घरों में मांगलिक कार्य भी प्रारंभ हो गया।
फूलों को लेकर अच्छी डिमांड, आज बरात
फूलों की मांग हमेशा बढ़ जाती है। अक्षय तृतीया पर हर साल लगभग यही स्थिति रहती है। इस बार गेंदे की एक माला 20 रुपये प्रति नग बिक रही है। खुल्ला गेंदा 60 रुपये प्रति किलो भाव है। वहीं गुलाब एक नग 20 रुपये तथा पंखुड़ी प्रति किलो 350 से 400 रुपये तक बिक रहा है। ईदगाह चौक स्थित फूल बाजार में एडवांस आर्डर भी किया गया है। मान्यतानुसार शुक्रवार को बरात व फेरे होंगे।









































