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छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती पर अभिमन्यु उदय मिश्रा का प्रधानमंत्री को पत्र…

कहा यदि जमीन और जलवायु अनुकूल है तो केवल सत्ता के संरक्षण में अवैध खेती क्यों? किसानों को वैध खेती का मिले अवसर

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया पैनलिस्ट अभिमन्यु उदय मिश्रा ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में हाल ही में पकड़ी गई अवैध अफीम की खेती के मामलों को लेकर केंद्र सरकार और प्रदेश की भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच और नीतिगत पहल की मांग की है।


मिश्रा ने अपने पत्र में कहा है कि छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध अफीम की खेती पकड़े जाने की घटनाएं यह भी साबित करती हैं कि प्रदेश की जमीन और जलवायु इस प्रकार की खेती के लिए अनुकूल हो सकती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यहां की परिस्थितियां इतनी अनुकूल हैं कि बड़े स्तर पर अफीम की खेती संभव है, तो फिर यह खेती केवल रसूखदार लोगों और सत्ता के संरक्षण में ही अवैध रूप से क्यों हो रही है?


उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में जिस तरह से लगातार अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आ रहे हैं उससे यह संदेह और गहरा होता जा रहा है कि कहीं न कहीं इस पूरे अवैध कारोबार को सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है। यदि ऐसा है तो यह प्रदेश की कानून व्यवस्था इंटेलिजेंस और शासन की पारदर्शिता सभी पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है ।


अभिमन्यु उदय मिश्रा ने कहा कि मीडिया में सामने आ रही खबरों और चर्चाओं में सत्ताधारी दल से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिससे यह पूरा मामला और अधिक संदिग्ध बन गया है। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है और इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर अवैध अफीम की खेती के इस नेटवर्क को किसका संरक्षण प्राप्त है।
मिश्रा ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि यदि छत्तीसगढ़ की भूमि और जलवायु वास्तव में अफीम की खेती के लिए इतनी अनुकूल है कि यहां बड़े पैमाने पर अवैध खेती संभव हो पा रही है, तो यह अवसर केवल सत्ता के संरक्षण में अवैध रूप से काम करने वाले लोगों तक ही सीमित क्यों रहे? छत्तीसगढ़ के मेहनतकश किसानों को भी वैधानिक रूप से यह अवसर मिलना चाहिए ताकि वे भी आर्थिक रूप से सशक्त और समृद्ध बन सकें।


उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश के कुछ चुनिंदा राज्यों जैसे मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ही केंद्र सरकार द्वारा लाइसेंस के माध्यम से अफीम की खेती की अनुमति दी जाती है वह भी सीमित जिलों में। इसके अलावा किस किसान को लाइसेंस मिलेगा इसका निर्णय भी केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। आगामी वित्तीय वर्ष में लगभग 1 लाख 21 हजार किसानों को लाइसेंस देने का लक्ष्य केंद्र द्वारा निर्धारित किया गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य के किसानों को इस अवसर से पूरी तरह वंचित रखना भी न्यायसंगत नहीं है।


अभिमन्यु उदय मिश्रा ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध अफीम की खेती आखिर किन लोगों के संरक्षण में हो रही थी और इसके पीछे कौन-कौन से प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं।


उन्होंने यह भी मांग की कि केंद्र सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए छत्तीसगढ़ में भी नियंत्रित और लाइसेंस आधारित अफीम की खेती की अनुमति देने की संभावनाओं का अध्ययन करना चाहिए इससे प्रदेश के किसानों को कानूनी रूप से बेहतर आय अर्जित करने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर प्राप्त होगा।


उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों को अवसरों से वंचित रखकर केवल सत्ता के संरक्षण में अवैध गतिविधियों को पनपने देना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। केंद्र सरकार को इस पूरे मामले में गंभीरता दिखाते हुए सच्चाई सामने लानी चाहिए और किसानों के हित में ठोस निर्णय लेना चाहिए।

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