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महीनों से टेंडर पास नहीं, 9वीं के छात्रों की पढ़ाई ठप,प्रशासन की लेटलतीफी का खामियाजा भुगत रहे छात्र, घर बैठे बीत रहा शैक्षणिक सत्र….


जगदलपुर। प्रयास आवासीय विद्यालय जगदलपुर में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावों के बीच प्रशासनिक लेटलतीफी का एक मामला सामने आया है। 9वीं कक्षा के छात्रों से जुड़ा टेंडर पिछले महीनों से लंबित है, लेकिन अब तक उसे मंजूरी नहीं मिल सकी है। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। समय पर शैक्षणिक व्यवस्था शुरू नहीं होने के कारण कई छात्र घर पर बैठे रहने को मजबूर हैं।

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9वीं कक्षा छात्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस कक्षा में उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए मजबूत आधार तैयार करना होता है। ऐसे में शैक्षणिक सत्र के कई महीने बीत जाने के बावजूद व्यवस्था शुरू नहीं होना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है। एक ओर स्कूलों में नियमित पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी चलनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर संबंधित छात्र प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।


बताया जा रहा है कि संबंधित टेंडर को लेकर प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी स्वीकृति नहीं मिल पाई है। सवाल यह है कि जब छात्रों का कीमती शैक्षणिक समय लगातार निकल रहा है, तो प्रशासन आखिर कब तक फाइलों और टेंडर प्रक्रिया में उलझा रहेगा?
प्रशासन से उठ रहे सवाल
महीनों से टेंडर लंबित रहने की वजह क्या है?
टेंडर को अब तक मंजूरी क्यों नहीं मिली?
छात्रों की पढ़ाई के नुकसान की भरपाई कैसे होगी?
जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
क्या प्रशासन ने छात्रों की पढ़ाई जारी रखने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की है?

मामला प्रशासनिक स्तर पर लंबित है तो यह भी सवाल उठ रहा है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस मामले में अब तक क्या कर रहे हैं? छात्रों का भविष्य किसी टेंडर या सरकारी फाइल की देरी का बंधक नहीं बनाया जा सकता। यदि संबंधित विभाग समय पर निर्णय नहीं ले पा रहा है तो उच्च अधिकारियों को हस्तक्षेप कर तत्काल समाधान निकालना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 9वीं के इन छात्रों के बीत रहे महीनों की भरपाई कौन करेगा? प्रशासन को टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ छात्रों की पढ़ाई तत्काल शुरू कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि देरी का असर उनके पूरे शैक्षणिक भविष्य पर न पड़े।

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