
राजनांदगांव। गोपीचंद गायकवाड अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में लाखो पीएम आवास की स्वीकृति का श्रेय प्रदेश सरकार ले रही है। इन पीएम आवास स्वीकृति के प्रचार में करोड़ों रुपए फूंके जा रहे है। लेकिन आवास योजना की राशि में रत्ती भर नहीं बढ़ी। ऐसे में पीएम आवास योजना गरीबों के कर्ज के गहरी खाई में धकेलने का काम कर रही है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार स्वयं की पीठ थपथपा रही है कि हमारे सरकार ने पहली हस्ताक्षर कर आठ लाख गरीबों को आवास देकर उनका भला करने के लिए किया है।
परन्तु आज के समय में पी एम आवास के लिए दी जाने वाली राशि पर्याप्त नहीं है। लिहाज़ा हितग्राही कर्ज लेकर आवास बनाने मजबूर है। आगे श्री गायकवाड ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा गरीबों को पीएम आवास बनाने के लिए 1 लाख 20 हजार सरकार दे रही है साथ ही नरेगा से 21 हजार रूपए भुगतान किया जा रहा है। इस तरह से हितग्राही को कुल 1 लाख 42 हजार पीएम आवास बनाने दिया जा रहा है। पीएम आवास ग्रामीण की राशि में पिछले दस
वर्षों से वृद्धि नहीं हुआ है। जबकि निकाय क्षेत्र में कई दफ्फ राशि में इजाफा किया गया है। इसके विपरित पिछले दस वर्षों में बिल्डिंग मटेरियल का भाव आसमान छू रहा है। आप अनुमान लगा सकते है कि पिछले दस वर्ष पहले सरिया का दाम क्या था और वर्तमान में छः हजार रूपए हो चला है। सीमेंट की किमतों में भी भारी इज़ाफ हुआ है। यहां तक कि ढाई सौ रुपए में काम करने वाले राज मिस्त्रीयों ने भी अपना रेट बढ़ा कर दोगुना कर दिया है। महंगाई के इस जमाने में क्या आवास के लिए दी जाने वाली राशि पर्याप्त है।
उन्होंने कहा कि अमीरों के तर्ज पर घर बनाने के चक्कर में कर्ज में डूब रहे हितग्राही पीएम आवास के लिए दी जाने वाली राशि के अनुरूप मकान निर्माण नहीं कर हितग्राही अपने हिसाब से संपन्न लोगों का नकल कर घर बनाने के चक्कर में कर्ज के दलदल में हितग्राही धस रहा है। परन्तु इसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं। पुराने मकान में पूरा संयुक्त परिवार एक साथ रहता था आवास स्वीकृत होने पर पूरा घर तोड़ना पड़ा अब वह घर 1 लाख 40 हज़ार में बनने से तो रहा, नतीजन हितग्राही मोटा कर्ज कर या जमीन बेंचकर मकान बनाने मजबूर है। कर्ज कर मकान नहीं बनाएगा तो सड़कों पर तंबू में रहने के अलावा कोई दूसरा चारा भी तो नहीं।

पीएम आवास हितग्राही शहरी और ग्रामीण के भेदभाव में पीस रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में 1.40 लाख रुपए पीएम आवास निर्माण के लिए प्रदान किए जा रहे है तो वहीं शहरी क्षेत्र में 2.80 लाख रुपए हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए दिए जा रहे है। अब ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में प्रदाय कि जाने वाली राशि शहर से आधा है जबकि दोनों हितग्राहियों को एक ही भाव में बिल्डिंग मटेरियल खरीदना है। तो आप अनुमान लगाएं की ग्रामीण क्षेत्र में आवास कैसे बनता होगा और हितग्राहियों को आवास के बदले नसीब में सिर्फ भारी भरकम कर्ज हाथ आता है।
श्री गायकवाड ने आगे कहा कि आवास की राशि को 3 लाख तक बढ़ाए सरकार ताकि गरीब परिवार आसानी से अपना सपनों का घर बना सके उसे कर्ज लेना नहीं पड़ेगा।
*प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाई जाए — महेंद्र यादव**
राजनांदगांव। जिला पंचायत सदस्य एवं जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण महामंत्री महेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना की वर्तमान राशि आज के बढ़ते निर्माण खर्च के अनुपात में बहुत ही कम है। उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में ₹1.20 लाख या ₹1.50 लाख में पूर्ण मकान बनाना असंभव है।
महेंद्र यादव ने सरकार से मांग की है कि आमजन की सुविधा के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि कम से कम ₹3 लाख की जानी चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों को वास्तव में पक्का मकान मिल सके और योजना का उद्देश्य सार्थक हो सके
*प्रधानमंत्री आवास योजना में कम राशि से गरीबों पर कर्ज का बोझ — अंजली राम गुलाल घावड़े**
छुरिया। जनपद पंचायत सदस्य श्रीमती अंजली राम गुलाल घावड़े ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर कहा कि हर गरीब और महिला का सपना होता है कि उनका खुद का पक्का घर हो, लेकिन योजना के तहत बहुत कम राशि मिलने के कारण गरीब परिवारों को कर्ज लेकर मकान पूरा करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में मजदूरी, सामग्री और निर्माण लागत बढ़ जाने से निर्धारित राशि में मकान बनाना संभव नहीं है।

श्रीमती घावड़े ने शासन से आवास योजना की राशि बढ़ाने की मांग की है ताकि वास्तविक रूप से गरीब परिवार बिना कर्ज के अपने सपनों का घर बना सकें।
*प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि एकमुश्त जारी की जाए — मेघराज मेघा चंद्राकर**
राजनांदगांव। जनपद पंचायत सदस्य मेघराज मेघा चंद्राकर ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शासन को चाहिए कि प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि लाभार्थियों को एकमुश्त (एक बार में) जारी की जाए, ताकि वे अपने आवास निर्माण कार्य को सुचारू रूप से पूर्ण कर सकें।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में किस्तों में राशि मिलने से कई गरीब लाभार्थियों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है और अधूरे मकान लंबे समय तक बन नहीं पाते। एकमुश्त राशि मिलने से लाभार्थी अपने घर को समय पर पूर्ण कर सकेंगे तथा योजना का उद्देश्य भी प्रभावी रूप से पूरा होगा।
*प्रधानमंत्री आवास योजना से गाँव-गाँव में चमके पक्के मकान, पर घटती राशि बनी चुनौती**
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना “प्रधानमंत्री आवास योजना” के चलते आज देश के गाँव-गाँव में पक्के मकान खड़े हो चुके हैं। इस योजना ने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अपने घर का सपना साकार किया है।
हालांकि, वर्तमान परिवेश में आवास निर्माण के लिए निर्धारित राशि अपेक्षाकृत कम होने के कारण कई लाभार्थियों को मनचाहा घर बनाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई और निर्माण सामग्री के ऊँचे दामों के चलते गरीब परिवारों को अक्सर कर्ज लेकर मकान पूरा करना पड़ रहा है, जिससे योजना का उद्देश्य कुछ हद तक प्रभावित हो रहा है।
इस संबंध में ग्राम पंचायत आरला की सरपंच श्रीमती साधना राहुल साहू ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने निश्चित रूप से गाँवों का स्वरूप बदला है और लोगों को पक्के मकान का सपना पूरा करने में मदद की है। लेकिन वर्तमान समय में निर्माण सामग्री के बढ़ते दामों को देखते हुए योजना की राशि अपर्याप्त साबित हो रही है। यदि सरकार राशि में कुछ बढ़ोतरी करे, तो ग्रामीणों को और अधिक लाभ मिल सकेगा तथा प्रधानमंत्री का “हर गरीब के पास पक्का घर” का सपना सच्चे अर्थों में साकार हो जाएगा।









































