
राजनांदगांव।जिले में नाबालिक बालिका के यौन शोषण से जन्मे नवजात शिशु के कथित अवैध सौदे, गैरकानूनी सोनोग्राफी, डिलीवरी एवं फर्जी दस्तावेजों के गंभीर मामले को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार रक्षक द्वारा जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, गहन एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि यह मामला न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देता है, बल्कि एक नाबालिक बालिका एवं नवजात शिशु के अधिकारों और भविष्य से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। आरोप है कि नाबालिक के यौन शोषण के बाद जन्मे बच्चे का अवैध रूप से सौदा किया गया, जिसमें अस्पतालों, डॉक्टरों एवं संबंधित कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है।
मानव अधिकार रक्षक ने मांग की है कि नाबालिक बालिका की सोनोग्राफी किस अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर में कराई गई, इसकी वैधता की जांच की जाए। साथ ही डिलीवरी किस अस्पताल में और किस डॉक्टर द्वारा कराई गई, यदि यह प्रक्रिया कानून के विरुद्ध हुई है तो संबंधित डॉक्टर एवं अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
इसके अतिरिक्त नवजात शिशु को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में बिना वैध रेफर पत्र के स्थानांतरित किए जाने, तथा जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने की भी विस्तृत जांच की मांग की गई है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि पूरे मामले में शामिल सभी दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड दिलाया जाना आवश्यक है।
इस अवसर पर मानव अधिकार रक्षक ने कहा कि यदि ऐसे मामलों में समय पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज में कानून के प्रति विश्वास कमजोर होगा। उन्होंने जिला प्रशासन से इस संवेदनशील प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है।









































