
मस्ती की पाठशाला
राजनांदगांव 31 मई। हर रविवार को मस्ती की पाठशाला में भीड़ बढती जा रही है। अल सुबह से बच्चे अपने परिवार के साथ पहुॅचकर पारंपरिक खेलो का मजा ले रहे है। सर्किट हाउस के सामने तथा चोपाटी एवं उसके सामने भीड का नजारा देखने को मिलता है। बच्चे एवं युवा सभी खेलों का आनंद लेकर अपनी प्रतिभा दिखतो है। उपस्थितजनों में जहाॅ महिलाओं ने कहा कि आज हमारे पारंपरिक खेल बाटी, भौरा, गिल्ली डंडा, बिल्लस जो लुप्त होते जा रहे है, वो मस्ती की पाठशाला में देखने को मिलती है।
उन्हांेंने कहा कि यहा आने से हमारी बचपन की यादे ताजा हो जाती है। वही पुरूषो ने कहा कि जो बच्चे छुटटी के दिन देर तक सोये रहते थे वे बच्चे सुबह 5 बजे से उठकर पाठशाला में आ जाते हैै। उन्हांेने कहा कि आज मोबाईल के कारण लोग परिवार और समाज से दुर होते जा रहे है, यहा आकर बच्चो को एक दुसरे के साथ मिलकर खेलते देख ऐसे लगता है कि हमारा बचपन वापस आ गया। सभी ने मस्ती की पाठशाला आयोजन के लिए महापौर सहित निगम प्रशासन का धन्यवाद दिया।
मस्ती की पाठशाला में हर सप्ताह नया देखने को मिलता है, इस रविवार का आकर्षण, बोरा दौड़, बाटी-चम्मच दौड़, आलू दौड़, रस्सा कसी प्रमुख रूप से था। इसके अलावा मटकी फोड, मोमबत्ती जलाव, बिल्लस, बाटी, भौरा, पिट्टुल तथा रस्सी कुद, बेडमिंटन, तीरंजदाजी, जम्प, कराटे आदि पारंपरिक खेल का बच्चे एवं युवाओ ने बहुत आनंद उठाया। उक्त खेलो में पुरूस्कार भी दिया गया। छोटे बच्चे अपने भाई बहन व दोस्तो के साथ झुला झुल फिसल पट्टी में फिसल कर मजा लेने के साथ साथ छोटे छोटे खेल में रिंग डालना, निशाना लगाना, उची कुद में भाग लिए। साथ ही पतंजलि भारत स्वाभिमान न्यास तथा योगासन स्पोर्टस एसोसिएशन गु्रप के साथ योग करने के अलावा रीदम रिवाल्युसन ग्रुप के साथ बडी संख्या में छोटे, बड़े बच्चे परिवार सहित जुम्बा डाॅंस में थिरकते नजर आए। वही छोटे छोटे बच्चो ने ड्राईंग सीट में चित्रकारी के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन किए। जिसमें अच्छी चित्रकारी करने वाले बच्चो को यामिनी कला केन्द्र के द्वारा पुरस्कृत किया गया। बाली अखाडा के छोटे बड़े बच्चों ने आग का गोला घुमाने के अलावा अखाडा के विभिन्न प्रदर्शन किये जिसे देख लोग आश्चर्य चकित रह गये।
आज की पाठशाला को सफल बनाने में बाडी टेक जीम, रीदम रिवाल्युसन गु्रप, योगा ग्रुप, मदर टेरेसा गु्रप, ब्लड डोनेड संघ, यामिनी कला केन्द्र, राजनांदगांव रनर गु्रप, सहित खेल जगत से हाॅकी, कराटे, तीरंदाजी के अलावा अन्य संघो की महती भूमिका रही मस्ती की पाठशाला में पार्षदो सहित बच्चे, युवा एवं बुजुर्गो की परिवार सहित बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।










































