
राजनांदगांव।शासकीय प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाली रसोइयों को सीएम द्वारा हाल ही में बजट में उनका मानदेय मात्र 18 सौ रूपये करने से अक्रोशित है। उनकी मांग है कि उन्हें कलेक्टर दर पर मानदेय दिया जाए। इस मांग को लेकर मध्यान्ह भोजन कर्मचारी एकता यूनियन (सीटू) ने जिला कार्यालय के सामने 15 दिनों के लिए सांकेतिक हड़ताल की शुरूआत की। यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि जिले भर की रसोईयां अगले 15 दिनों तक रोज सुबह डेढ़ घंटे स्कूल में अपना कार्य करके यहां हड़ताल में अपनी आवाज बुलंद करेंगी।

यूनियन के समीर कुरैशी ने बताया कि सीएम भूपेश बघेल ने बजट में रसोईयों का मानदेय 15 सौ से बढ़ाकर 18 सौ किया है, जो कि उनके काम और समर्पण का मखौल उड़ाने जैसा है। 60 रूपये रोजी से घर खर्च चलना तो दूर चूल्हा तक नहीं जलता है। गत वर्ष 25 फरवरी को हाई कोर्ट ने रसोईयों को समान काम समान वेतन के आधार पर कलेक्टर दर देने का निर्णय सुनाया था, लेकिन भूपेश सरकार ने कोर्ट के इस आदेश को दबा दिया। तीन माह बाद सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि रसोईया रोजाना मात्र डेढ़ घंटे ही काम करती हैं।
उन्होंने बताया देश की दूसरे राज्यों हरियाणा में मध्यान्ह भोजन वालों को प्रतिमाह सात हजार, पंजाब में तीन हजार, कर्नाटक में 37 सौ, केरल में प्रतिदिन 600 रूपये मजदूरी दी जाती है। इसलिए छग की रसोईयां भी अपने हक के लिए आर पार की लड़ाई शुरू कर रही हैं। रोज सुबह साढ़े नौ बजे से 11 बजे तक स्कूल में मध्यान्ह भोजन संबंधी कार्यों को करेंगी। फिर वहां से यहां आकर धरना प्रदर्शन में शामिल होंगी। अभी राज्य का विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। इसमें यदि सरकार कलेक्टर दर की मांग को नहीं मानती है,
तो यूनियन सरकार को एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक का समय देगी, क्योंकि इस अवधि में बच्चों की परीक्षाएं होती हैं, और उनकी यूनियन परीक्षाएं बाधित नहीं करना चाहती है। यदि इसके बाद भी सरकार कलेक्टर दर की घोषणा नहीं करती है तो 15 जून से यूनियन शिक्षा मंत्री एवं अन्य से मुलाकात और ज्ञापन के माध्यम से एक जुलाई से कलेक्टर दर को मांग करेगी। उनकी मांग पूरी नहीं होने पर एक जुलाई से 30 नवंबर तक मध्यान्ह भोजन कर्मचारी इसी तरह जितना दाम उतना काम की तर्ज पर स्कूलों में सुबह डेढ़ घं काम करेंगे, और दिन भर हड़ताल पर बैठेंगी।









































