
राजनांदगांव शहर के मोहड़ वार्ड नंबर 49 में लगभग 13 परिवार की ये महिलाएं सामुदायिक भवन मे कपड़ा बुनकर अपने परिवार की जीविका चलाने के कार्य मे जुटी हुई थी । सरकार ने महिला सशक्तीकरण को बढावा देने और महिलाओ को आत्म निर्भर बनाने इन महिलाओ कपडा बुनने फ्रेम लूम दिया गया है। फ्रेम लूम को घर पर लगाने इन महिलाओं के पास जगह नहीं होने के चलते इन्होने पूर्व महापौर मधुसूदन यादव के कार्यकाल में भवन बनाने की मांग की थी, ताकि उस भवन में यह महिलाएं कपड़ा बुनने का काम कर सके। पूर्व महापौर ने भी स्वीकृति दी और वार्ड में सामुदायिक भवन का निर्माण किया गया।

इस सामुदायिक भवन में महिलाएं अब तक चादर कपड़े बुनने का कार्य करती आ रही थी, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों के निर्देश पर राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 7 अगस्त के दिन ही इन महिलाओं को भवन से बेदखल कर दिया गया। महिलाओं ने नगर निगम के अधिकारियों से भवन को खोलने की लाख मिन्नतें की लेकिन इन महिलाओं के कार्य करने हेतु भवन नहीं खोला गया, तब ये महिलाएं अपने मासूम बच्चों को लेकर गांधीजी के आदर्शों पर चलते हुए ही सत्याग्रह शुरू कर दिया है और कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने अपने मासूम बच्चों के साथ अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ कर दिया है। इन महिलाओं का कहना है कि उनके पास कपड़ा बुनने घर में जगह नहीं है, उनके कहने पर ही पूर्व महापौर ने भवन की स्वीकृति दी थी, जिस भवन में अब तक सभी महिला काम करती आ रही थीं, लेकिन अब उन्हें यहां से बेदखल किया गया है। महिलाओ ने कार्यशाला के लिए भवन की मांग की है और आनिश्चित कालीन धरने पर बैठी हुई है ।
भवन से बेदखल किए जाने के बाद लगभग 13 परिवारों की इन महिलाओं का कार्य प्रभावित हो रहा है और उन्हें अपने परिवार की जीविका चलाने में भी कठिनाई हो रही है। 7 अगस्त राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के दिन जब देशभर के बुनकर उत्साह मना रहे थे तब मोहड़ की अन्नपूर्णा बुनकर समिति की महिलाओं को भवन से बेदखल किया जा रहा था। इन महिलाओं ने एसडीएम के नाम एक ज्ञापन सौंपकर भवन का ताला खुलवाने की मांग की है, ताकि वे पूर्व की भांति ही अपने कार्य का संचालन सामुदायिक भवन में कर सकें।









































