
राजनांदगांव। क्षेत्रीय पुनर्वास केन्द्र (सीआरसी) ठाकुरटोला में मानसिक बीमारी एवं मनोसामाजिक दिव्यांगता वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष शिक्षकों एवं पालकों की कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बौद्धिक मंदता वाले बालकों के लिए चिंतन करते हुए विकासात्मक स्वरूप प्रदान किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए सहायक आयुक्त दिव्यांगजन सुश्री अर्चना यादव ने कहा कि बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के अध्यापन की प्रक्रिया सामान्य पाठ्यक्रम से अलग और उनकी समझ एवं क्षमता के अनुरूप होनी चाहिए।
उप संचालक समाज कल्याण श्रीमती वैशाली मरडवार ने कहा कि सीआरई कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों, विशेष शिक्षकों एवं पालकों की समझ और क्षमता में विकास की प्रबल संभावना होती है। आयुक्त दिव्यांगजन श्री रामजीवन देवांगन ने कार्यशाला में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के विकास के लिए पहचान एवं समझ, सम्मान एवं गरिमा, व्यक्तिगत शिक्षण, परिवार एवं विशेषज्ञों से समन्वय, आत्मनिर्भरता तथा सामाजिक समावेश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यशाला को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान सीहोर के राज्य प्रमुख ने भी संबोधित किया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में विशेष शिक्षक एवं स्पेशल एजुकेटर्स शामिल हुए। कार्यशाला के अंत में संस्था की निदेशक श्रीमती स्मिता महोबिया ने सभी अतिथियों, विशेष शिक्षकों, स्पेशल एजुकेटर्स एवं पालकों के प्रति आभार व्यक्त किया।










































