यात्रा वृत्तान्त : जितेन्द्र मिश्रा…

बहुत दिनों बाद शहर के पुराने नए मित्रों के साथ एक शादी समारोह में राजस्थान के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल उदयपुर जाना हुआ।इसके पहले राजस्थान के माउंट आबू के रास्ते सड़क मार्ग से कभी उदयपुर गए हुए थे लंबा अंतराल हो गया था।तकरीबन 15 वर्षों बाद उदयपुर जाने का संयोग बना।राजनांदगांव के एक मित्र के भाई के शादी समारोह में अचानक जाने की तैयारी हो गई राजनांदगांव से कुछ कुछ बड़े तथा कुछ छोटे साथी उदयपुर के लिए तैयार हुए। यह यात्रा राजनांदगांव से ही शानदार तरीके से शुरू हुई। रायपुर से 10:00 बजे इंदौर के लिए फ्लाइट थी। हम सब रायपुर अलग अलग वाहनों से पहुंचे। भिलाई के भी कुछ मित्र साथ में थे।रायपुर में सभी मित्र एक ही फ्लाइट में एक ही साथ सवार होकर कब इंदौर पहुंच गए पता ही नहीं चला।इंदौर एयरपोर्ट पर 2 घंटे का अंतराल था।

हमेशा से घूमने वाले कुछ साथियों को यह पता था इंदौर की होटल में बेहतरीन भोजन।कहां मिलता है फिर देर किस बात की थी इंदौर एयरपोर्ट से बाहर आए और फिर सभी साथी अलग-अलग वाहन सवार होकर इंदौर के सबसे बड़े होटल में पहुंच गए वहां पर सभी ने अपने-अपने हिसाब से मनपसंद खाना खाया होटल के स्टाफ भी पूरी तन्मयता के साथ मेहमान समझकर भोजन परोसने में बगैर देरी किए फ्लाइट की उड़ान का ध्यान रखा। हम सब फिर से खाना खाकर इंदौर एयरपोर्ट आ गए। यहां से उदयपुर के लिए छोटी फ्लाइट रही। हंसी मजाक का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा था। 1 घंटे की उड़ान में हम उदयपुर पहुंच गए। वहां से हमें होटल तक के सफर के लिए जहां पर शादी समारोह का आयोजन था बरसते पानी में वहां के लिए रवाना है गए। सब एक साथ सवार हुए फिर चल दिए आगे के सफर के लिए ।यह तो बताना भूल ही गया कि जब हम उदयपुर के आसमान में थे तभी यहां का मौसम सुहाना हो गया था। जब इंडिगो की फ्लाइट एयरपोर्ट में लैंड किया तब अच्छी खासी बारिश हो रही थी।

हम वहां से बाहर निकले और अपने वाहन में एक साथ सवार होकर गंतव्य की ओर रवाना हुए रास्ते में उदयपुर का प्रसिद्ध नाश्ता मिर्ची भजिया का साथियों ने जमकर आनंद लिया।उदयपुर की मिर्ची भजिया हर मायने में यहां से अलग थी।हो रही बारिश में गरम कचौड़ी भी आनंद लेने में भी मित्र पीछे नहीं रहे। तत्पश्चात हम सब पहुंच गए शादी समारोह स्थल पर। यात्रा के दौरान हंसी मजाक का भरपूर डोज होने से थका।तो कोई था नहीं
सभी अपने-अपने रूम में गए फिर से तैयार होकर एक शादी समारोह।में इकट्ठे हुए ।होटल का रूम तो अलग-अलग था लेकिन ऐसा लग रहा था कि एक रूम में ही सब को ठहरना है। शाम को शादी समारोह के संगीत संध्या में शामिल होना भी सभी मित्रों के लिए यादगार साबित हुआ ।रात को आदत के अनुसार वाक के दौरान उदयपुर की स्थानीय लोगों से जब चर्चा छिड़ी तब।उदयपुर की खूबसूरती से लेकर यहां के प्रसिद्ध किले और झीलों।के बारे में जानकारी दी गई।जहां हम ठहरे थे पहाड़ियों पर बनाया गया कांच का महल भी वास्तव में रात को और अपनी सुंदरता बिखेर रहा था संगीत संध्या के बाद हम मित्रों की बात पूरी नहीं हुई थी खाना खाते ही फिर सब एकत्रित हो गए। मित्रों की उम्र का अंतर दिख नहीं रहा।

सभी तरह की चर्चाएं चल रही थी जैसा कि हमेशा होता है। राजनीति से लेकर व्यापार पर्यटन हर क्षेत्र में एक से एक वक्ता।शामिल हो रहे थे।रात के तीन कब बज गए पता ही नहीं चला सुबह जब आंख खुली तो 9:00 बज रहे थे। फिर हम सब तैयार हुए कुछ मित्र अपने काम से सुबह ही रवाना हो गए थे उदयपुर से उनकी फ्लाइट थी बाहर जाना था निकल गए थे। हम सब फिर तैयार होकर नाश्ते की टेबल में योजना तैयार की और 12:बजे शादी समारोह में न केवल भाग लिया बल्कि बाराती के रूप में लंबे अरसे बाद जमकर झूमे और नाचे भी। 1:00 बजे सभी का सामान फिर उसी टूरिस्ट बस में रखा गया जिसमें हम एक दिन पहले पहुंचे थे टूरिस्ट बस का सफर एयरपोर्ट के लिए शुरू हुआ। डेढ़ घंटे का सफर था एयरपोर्ट पहुंचने के लिए हम सब निकल और पता चला कि रास्ते में जाम चल रहा है फिर रास्ता बदल गया और बस के चालक ने समय पर उदयपुर एयरपोर्ट पहुंचा दिया।

इस बार उदयपुर से हमें दिल्ली जाना था हमारा सफर उदयपुर से ही लेट हो गया था।अच्छी बात है रही उदयपुर से दिल्ली की फ्लाइट एयरलाइंस की थी और इस एयरलाइंस कंपनी से हम सबको रायपुर आना था।सो एयरलाइन वालों की मजबूरी थी क्योंकि हम छोटी बारात के रूप में थे इसलिए दिल्ली से 6:बजे उड़ान भरने वाली फ्लाइट में हम सब का अच्छा खासा इंतजार किया दौड़ते हुए हम दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट से रायपुर के लिए रवाना हो गए।रायपुर आते ही लगा हम अपने गांव लौट आए हैं। वहां से भिलाई में फिर एक डिनर पार्टी हुई और फिर सभी के करके अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए लेकिन 2 दिन तक सभी मित्रों ने इस यात्रा को जो खूब इंजॉय किया था।एक दूसरे से यात्रा का वृत्तान्त शेयर करते रहे साथ में यह वादा भी किया कि जब भी आगे कोई अवसर आएगा इसी तरह की यात्रा होगी अवसर कब आएगा अभी हम कह तो नहीं सकते लेकिन वास्तव में एक शादी समारोह के बहाने उदयपुर की यात्रा हम मित्रों के बीच काफी यादगार रहेगी।


समय अभाव के कारण हम सब भ्रमण तो नहीं कर पाए लेकिन झीलों के इस शहर में पूरे विश्व में विख्यात उदयपुर की झील वास्तव में लोगों को अपनी ओर सहजता के साथ आकर्षित करती है हमारे रस्ते में पड़ने वाली झील और किला देखने लायक है । अब कभी उदयपुर जाना हुआ तो कम से कम 3 से 4 दिन का समय लेकर ही जाया जाए तो जो यहां के दर्शनीय स्थल है उन्हें देखा जा सकता है और वहां घूम जा सकता है उदयपुर के बारे में जो स्थानीय रह वासियों ने बताया है उनके मुताबिक उदयपुर में देखने लायक बहुत सारे दर्शनीय।स्थल हैं।

वैसे मैं आपको इस यात्रा वृतांत के माध्यम से यह बताना चाहूंगा की पहाड़ियों के बीच में चारों तरफ से घिरा उदयपुर की सुंदरता देखते ही बनती है यहां के इतिहास के बारे में भी मैं कुछ जानकारी आपको देना चाहता हूं जो वास्तव में लोगों का ध्यान।सहजता के साथ अपनी ओर आकर्षित करती है।उदयपुर को लेकर यहां के स्थानीय नागरिकों का ऐसा कहना था कि अगर सही मायने में उदयपुर का पर्यटन स्थल भ्रमण करना है तो कम से कम 4 से 5 दिन का समय उदयपुर को देना पड़ेगा ।वैसे तो उदयपुर में पर्यटन स्थलों की भरमार है जो देखने लायक हैं लेकिन उन में भी कई प्रमुख स्थान हैं जहां पर छुट्टियां बिताई जा सकती हैं।

उदयपुर में जूना मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है। करणी माता टेंपल से लेकर यहां का सन सेट भी काफी संख्या में पर्यटक को अपनी ओर खींचता है। इनके अलावा सज्जनगढ़ पैलेस जिसे मानसून पैलेस भी कहते हैं यह भी पर्यटकों को अपनी ओर लुभा रहा है। उदयपुर की अरावली हिल्स भी पर्यटकों का ध्यान खींच रही है। यहां का सबसे अधिक प्रसिद्ध सिटी पैलेस जिसका निर्माण 400 साल पहले राजा उदय सिंह ने कराया था काफी प्रसिद्ध है। उदयपुर अगर जाए तो सिटी पैलेस को देखना कभी ना भूले ।साथ में फतेहसागर जगदीश टेंपल भी काफी खूबसूरत है। जगदीश टेंपल का निर्माण राजा जगत सिंह ने कराया था।

इस टेंपल में भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित है ।उदयपुर में 18वीं शताब्दी में बनाई गई बागोर की हवेली भी काफी सुंदर है। सहेलियों की बाड़ी के नाम से प्रसिद्ध गार्डन में भी प्रतिदिन हजारों लोग पहुंचते हैं। इनके अलावा गंगौर और अमरोही का घाट उदयपुर की शोभा को बढ़ाता है ।झीलों के शहर में कम से कम 4 से 5 दिन व्यतीत करने के बाद ही असल में उदयपुर के पर्यटन का आनंद उठाया जा सकता है। हमारे मित्रों की टोली को यह भी बताया गया कि जहां पर हम ठहरे थे उसके।पास अस्तबल था।

जो वास्तव में बहुत अच्छा था। यहां की।देख रेख करने वालो से पता चला की अस्तबल में घोड़े तो कई थे लेकिन एक ऐसा भी घोड़ा है जिसकी कीमत65 लाख है ।यह।घोड़ा वास्तव में काफी मन को मोहने वाला था। इस यात्रा ने सभी मित्रों को काफी तरो ताजा तो किया ही और यह भी तय किया कि आने वाले समय में अब जब कभी भी उदयपुर जाने का मौका मिलेगा तो 4 से 5 दिन का समय लेकर मित्रों की टोली फिर रवाना होगी। इस बार उदयपुर की संक्षिप्त यात्रा में बहुत कुछ घूमने को बाकी तो रह गया है लेकिन वहां के नागरिकों ने चर्चा में ही पूरा उदयपुर का भ्रमण कर दिया है।।