राजनांदगांव में पशु चिकित्सा व्यवस्था ध्वस्त: “गौ-भक्ति” के दावे बेनकाब—ऋषि शास्त्री…

डॉक्टरों की कमी, मोबाइल मेडिकल यूनिट लापता, दवाइयों का अभाव; गर्भवती गायों के इलाज पर गहराया संकट

राजनांदगांव। डॉ. रमन सिंह के विधानसभा क्षेत्र राजनांदगांव में पशु चिकित्सा सेवाओं की बदहाल स्थिति को लेकर युवा नेता एवं पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि डबल-ट्रिपल इंजन सरकार के बड़े-बड़े दावे केवल प्रचार तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह विपरीत और चिंताजनक है।


ऋषि शास्त्री ने आरोप लगाया कि जिले के पशु चिकित्सालयों में बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव है। अस्पतालों में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। विशेष रूप से गाइनोलॉजिस्ट की कमी के चलते गर्भवती गायों का समय पर और समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है, जिससे पशुधन पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति सरकार की “गौ-सेवा” की कथनी और करनी के बीच के अंतर को उजागर करती है।


उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशु उपचार की रीढ़ मानी जाने वाली मोबाइल मेडिकल यूनिट या तो पूरी तरह गायब हो चुकी है या केवल कागजों में संचालित हो रही है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और कई बार समय पर इलाज न मिलने से पशुओं की स्थिति गंभीर हो जाती है। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता और योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही को दर्शाता है।


शास्त्री ने शासकीय दवाखानों में दवाइयों की कमी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं होने के कारण पशुपालकों को मजबूरी में निजी दुकानों से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यह स्थिति केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है। “सरकारी दवाइयां आखिर जा कहां रही हैं?”—यह सवाल आज आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए ऋषि शास्त्री ने कहा कि “गौ-भक्ति” के नाम पर केवल राजनीतिक लाभ लिया जा रहा है, लेकिन जब वास्तविक सेवा, संरक्षण और उपचार की बात आती है, तो पूरी व्यवस्था नाकाम साबित होती है। उन्होंने कहा कि गौ-रक्षक और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं, जो बेहद चिंताजनक है।


उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही पशु चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे पशु सेवकों, पशुपालकों और आम नागरिकों के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे। इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


अंत में ऋषि शास्त्री ने मांग की कि जिले के सभी पशु चिकित्सालयों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति की जाए, मोबाइल मेडिकल यूनिट की सेवाओं को तत्काल पुनः शुरू किया जाए तथा शासकीय दवाखानों में दवाइयों की नियमित और पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि बेजुबान पशुओं को समय पर और समुचित उपचार मिल सके।