
रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। प्रदेशभर में जारी इस आंदोलन के बीच कर्मचारियों में बीज निगम प्रबंधन एवं प्रबंध संचालक के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्षों तक निगम की सेवा करने के बावजूद उनकी मूलभूत एवं न्यायसंगत मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सबसे महत्वपूर्ण “श्रम सम्मान निधि” की राशि को पुनः बहाल किए जाने की मांग है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें मिलने वाली 4000 रुपये की श्रम सम्मान निधि राशि को दिसंबर माह से बिना किसी लिखित आदेश, सूचना अथवा वैधानिक प्रक्रिया के बंद कर दिया गया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि यह निर्णय पूरी तरह मनमाना एवं कर्मचारी विरोधी है।
बिना किसी आधिकारिक आदेश के वर्षों से मिल रही राशि को अचानक बंद कर देना कर्मचारियों के साथ अन्याय है।कर्मचारियों का कहना है कि पहले से ही बेहद कम वेतन में कार्य कर रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए यह 4000 रुपये की राशि एक बड़ी आर्थिक सहायता थी। इसी राशि से उनके परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई एवं दैनिक जरूरतें पूरी होती थीं, लेकिन प्रबंधन ने बिना किसी संवेदनशीलता के इसे बंद कर कर्मचारियों को आर्थिक संकट में धकेल दिया।दूसरी प्रमुख मांग आकस्मिक मृत्यु होने पर कर्मचारी के परिवार को 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की है।
कर्मचारियों का कहना है कि निगम में वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के लिए किसी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं है। यदि किसी कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। इसलिए कर्मचारियों ने मानवीय आधार पर सहायता राशि की मांग की है।इधर हड़ताल को कमजोर करने के लिए बीज निगम प्रबंधन द्वारा लगातार नए-नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि नियमित कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है कि “साम, दाम, दंड, भेद” किसी भी तरीके से बीज भंडारण कार्य कराया जाए। वहीं कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को भी बिना स्पष्ट नियमों के बीज निगम में कार्य करने भेजा जा रहा है।
कर्मचारियों ने इसे पूरी तरह तानाशाहीपूर्ण एवं नियम विरुद्ध कार्रवाई बताया है।आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि यदि प्रबंधन के पास आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को 15 से 17 हजार रुपये तक देने के लिए बजट उपलब्ध है, तो वर्षों से निगम की सेवा कर रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की 4000 रुपये की श्रम सम्मान निधि बहाल करने में आखिर समस्या क्या है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन बातचीत एवं समाधान की दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं कर रहा, बल्कि आंदोलन को दबाने एवं कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का काम कर रहा है।प्रदेश के अधिकांश बीज भंडारण केंद्रों में कार्य प्रभावित हो चुका है। बीज उठाव एवं भंडारण व्यवस्था चरमरा गई है,
लेकिन इसके बावजूद उच्च अधिकारियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराने के बजाय सब कुछ सामान्य दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि निगम की वर्तमान स्थिति के लिए पूरी तरह प्रबंधन की हठधर्मिता एवं प्रबंध संचालक की तानाशाही जिम्मेदार है।दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी दो सूत्रीय मांगों — दिसंबर माह से बंद की गई 4000 रुपये की श्रम सम्मान निधि राशि को पुनः बहाल करने एवं आकस्मिक मृत्यु पर 50 हजार रुपये सहायता राशि प्रदान करने — पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन लगातार जारी रहेगा। कर्मचारियों ने कहा कि वे अपने अधिकार, सम्मान एवं परिवार की सुरक्षा के लिए अंतिम दम तक संघर्ष करेंगे।










































