
डोंगरगढ़-खैरागढ़ के जंगलों में वन्यजीव संरक्षण पर उठे सवाल, तेंदुए की लोकेशन सार्वजनिक होने से शिकार का भी खतरा

डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ में एक बार फिर तेंदुए की मौजूदगी सामने आई है। प्रज्ञागिरी पहाड़ पर तेंदुआ दिखाई देने का करीब 1 मिनट 32 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। वहीं वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण से जुड़े लोगों ने इस घटना को डोंगरगढ़-खैरागढ़ क्षेत्र के समृद्ध जंगलों में मौजूद जैव विविधता के संरक्षण से जोड़ते हुए कई सवाल उठाए हैं।
बताया जाता है कि डोंगरगढ़ क्षेत्र में पिछले कई दशकों से तेंदुए की मौजूदगी के प्रमाण मिलते रहे हैं। समय-समय पर मानव-वन्यजीव संघर्ष और हमले की घटनाएं भी सामने आई हैं। दूसरी ओर इस क्षेत्र में तेंदुओं के अवैध शिकार के मामले भी चिंता का विषय रहे हैं।
कई मामलों में तेंदुए की खाल और नाखून के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि तेंदुए के शव मिलने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में प्रज्ञागिरी पहाड़ पर तेंदुए की मौजूदगी का वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक रहवास को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जंगल और जैव विविधता के संरक्षण पर सवाल
डोंगरगढ़ से खैरागढ़ तक फैले जंगल वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक रहवास माने जाते हैं। इन जंगलों में तेंदुए के अलावा कई अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी भी बताई जाती है। सरकारी स्तर पर जंगलों में बांस कटाई और बिगड़े वनों के सुधार जैसी गतिविधियां होती रही हैं, लेकिन वन्यजीवों के प्राकृतिक रहवास, सुरक्षित आवागमन मार्ग, शिकार पर प्रभावी नियंत्रण और जैव विविधता के दीर्घकालीन संरक्षण को लेकर व्यापक योजना की जरूरत महसूस की जा रही है।
सोशल मीडिया पर लोकेशन सार्वजनिक होना भी चुनौती
तेंदुए की तस्वीर या वीडियो सामने आते ही उसकी लोकेशन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाती है। इससे वन्यजीव को देखने और उसका वीडियो बनाने के लिए लोग जंगल और पहाड़ों की ओर पहुंचने लगते हैं। इससे जहां वन्यजीव के प्राकृतिक व्यवहार में बाधा उत्पन्न होने की आशंका रहती है, वहीं उसकी मौजूदगी और लोकेशन की जानकारी अवैध शिकारियों तक पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि संवेदनशील वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए निगरानी व्यवस्था कितनी मजबूत है। क्या तेंदुए की लोकेशन सार्वजनिक होने के बाद वन विभाग द्वारा तत्काल क्षेत्र में निगरानी और पेट्रोलिंग बढ़ाई जाती है? क्या ऐसे इलाकों में पर्याप्त कैमरा ट्रैप, नियमित गश्त और एंटी-पोचिंग निगरानी की व्यवस्था है?
पर्यटन से पहले वन्यजीवों की सुरक्षा जरूरी
डोंगरगढ़ धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। पहाड़ और जंगल क्षेत्र में ट्रैकिंग, पर्यटन तथा अन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं। ऐसे में वन्यजीवों के प्राकृतिक रहवास को ध्यान में रखते हुए पर्यटन गतिविधियों का नियमन भी जरूरी है। जंगल वन्यजीवों का प्राकृतिक घर हैं और पर्यटन विकास के साथ उनकी सुरक्षा तथा मानव सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
हर बार तेंदुआ दिखाई देने के बाद प्रशासन और वन विभाग की सक्रियता सामने आती है, लेकिन अब जरूरत तत्काल कार्रवाई से आगे बढ़कर स्थायी और दीर्घकालीन संरक्षण योजना बनाने की है। दशकों से तेंदुए की मौजूदगी और समय-समय पर सामने आने वाली शिकार की घटनाओं के बीच बड़ा सवाल यही है कि डोंगरगढ़-खैरागढ़ के जंगलों को वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से मजबूत सुरक्षा कवच कब मिलेगा।
सवाल सिर्फ प्रज्ञागिरी पर दिखाई दिए एक तेंदुए का नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि डोंगरगढ़ के जंगलों में रहने वाले तेंदुए और दूसरे वन्यजीव आने वाली पीढ़ियों के लिए कितने सुरक्षित रहेंगे।











































