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राजनांदगांव: राज्योत्सव में स्वच्छता दीदियों की ‘कबाड़ से जुगाड़’ प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र…

’कांतारा फिल्म की झांकी ने खींचा नागरिकों का ध्यान,
प्रभारी मंत्री गजेंद्र यादव ने की सराहना’

’राजनांदगांव 3 नवम्बर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 26 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में आयोजित जिला स्तरीय राज्योत्सव 2026 में नगर पालिक निगम राजनांदगांव का स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहा।

निगम की स्वच्छता दीदियों ने ‘कबाड़ से जुगाड़’ की थीम पर अनुपयोगी वस्तुओं से आकर्षक कलाकृतियां और झांकी तैयार कर स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

प्रदर्शनी में कांतारा फिल्म की झांकी विशेष आकर्षण रही, जिसे देखने के लिए बडी संख्या में जिले वासियो की सहभागिता रही। राज्योत्सव में विभिन्न स्टॉलों के अवलोकन के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री गजेंद्र यादव ने नगर निगम के इस नवाचार की सराहना की।


स्वच्छता दीदियों द्वारा तैयार प्रदर्शनी में बेकार और अनुपयोगी वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग कर उन्हें आकर्षक कलाकृतियों का रूप दिया गया। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जिसे हम कचरा समझकर फेंक देते हैं, उसका भी बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

स्वच्छता दीदीयो द्वारा कांतारा की झाकी बनाने में वेस्ट गुड़िया काटुन, बाटल, थरमाकोल, फूल, गजरा का उपयोग किया गया था। इसी प्रकार वेस्ट बाटल, डिब्बा आदि से छत्तीसगढ महतारी सहित टाॅय बाईसिकल, डोरेमोन, जिराफ, शेर, मगरमच्छ, केकड़ा आदि आकर्षक खिलोने बनाए गये थे।

प्रदर्शनी के जरिए वेस्ट टू आर्ट, रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल की अवधारणा को फलीभूत किया गया। साथ ही नागरिकों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने, प्लास्टिक का उपयोग नही करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित करते हुए शहर को स्वच्छ संुदर, पर्यावरण अनुकुल प्लास्टिक फ्री बनाने का संदेश दिया गया।


51 वार्डों में 17 एसएलआरएम सेंटर, 442 स्वच्छता दीदियां संभाल रहीं जिम्मेदारी’ उल्लेखनीय है कि राजनांदगांव नगर निगम क्षेत्र के 51 वार्डों में 17 एसएलआरएम (ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन) सेंटर संचालित हैं। यहां 442 स्वच्छता दीदियां कार्यरत हैं, जो प्रतिदिन घर-घर जाकर कचरा संग्रहण करती हैं।

वे गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण कर उसके उचित प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन केंद्रों में कबाड़ और जैविक खाद की बिक्री से अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा रही है।


राज्योत्सव में स्वच्छता दीदियों की इस प्रदर्शनी ने न केवल उनकी रचनात्मकता और मेहनत को मंच दिया, बल्कि यह भी साबित किया कि स्वच्छता अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि कचरे को संसाधन में बदलकर रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को बल दिया जा सकता है।