राजनांदगांव मार्कफेड के लचर रवैए के चलते 700 करोड रुपए का धान उपार्जन केंद्रों में ही सड़ने लगा है धान खरीदी के बाद समय पर कस्टम मिलिंग नहीं कराने के कारण करोड़ों रुपए का धान खराब हो गया है। उधर राज्य शासन द्वारा नीलामी का प्लान ध्वस्त हो गया महिलाओं ने सरकारी धान को खरीदने में रुचि नहीं दिखाई है इधर प्रशासन द्वारा भी ध्यान उठाव में तेजी नहीं लाई गई है।

रविवार शाम और सोमवार सुबह तेज बारिश से बोरे में रखा धान पूरी तरह से भीग चुका है मिली जानकारी के अनुसार जिले के उपार्जन केंद्रों में 28 लाख क्विंटल धान का अब तक उठाव नहीं हो सका सोसाइटी प्रबंधक लगातार मार्कफेड से उठाएं कराने गुहार लगा रहे हैं । लेकिन इसके बाद भी करोड़ों रुपए के धान को बारिश में सड़ने के लिए छोड़ दिया गया है ।
मार्कफेड की लापरवाही के कारण राज्य शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान हो गया है । जिला सहकारी बैंक के सीईओ का कहना है कि धान के उठाव के लिए कई बार मार्कफेड को पत्र लिख जा चुका है लेकिन उठाव नहीं होने के कारण प्रबंधकों की भी चिंता बढ़ गई है करोड़ों रुपए के धान की सुरक्षा यहां भगवान भरोसे है।
बगैर कैंप कव्हर सुरक्षा का दवा
रविवार और सोमवार की तेज बारिश से कन्हारपुरी ,ढाबा सिंघोला ,पदमपुरा ,भानपुर से जिले के मानपुर मोहला छुईखदान , खैरागढ़ ,गंडई , राजनांदगांव डोंगरगढ़ और डोंगरगांव के सभी केंद्रों में धान भीग चुका है। सोसायटी प्रबंधकों ने बताया कि धान भीगने के चलते सड़ने की नौबत आ गई है। बारिश और तेज हवा के चलते कैंप कव्हर भी उड़ गया।
नहीं किया भौतिक सत्यापन
कलेक्टर टीके वर्मा ने धान खरीदी समाप्त होने के बाद सभी केंद्रों का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए थे । इस दौरान औपचारिकता के तौर पर भौतिक सत्यापन करने की बात सामने आई थी लेकिन प्रशासन द्वारा अब तक भौतिक सत्यापन ही नहीं कराया गया है कई केंद्रों में धान हेरा फेरी किए जाने की भी शिकायत आ रही है।










































