राजनांदगांव 31 मई 2021। डॉ. खूबचंद बघेल सम्मान से सम्मानित डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम पारागांव के कृषक एनेश्वर वर्मा ने बताया कि कृषि के प्रति रूझान और उत्सुकता के कारण वे वैज्ञानिक पद्धति से कृषि करने को अग्रसर हुए और आज 17 एकड़ भूमि में उन्नत कृषि कर रहे हैं।

शासन की योजना से लाभान्वित होते हुए किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। शासन की नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना से किसानों के जीवन में खुशहाली आ रही है। खेती-किसानी के लिए सफलता के गुर बताते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में खेती में रूचि रखने वाला कोई भी व्यक्ति अपना बेहतर और उज्ज्वल भविष्य देख सकता है। इसके लिए मुख्य रूप से कुछ बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
मिट्टी की जांच –
किसी भी फसल की खेती से पहले यहाँ जान लेना उचित है कि खेत की भूमि उस फसल के के लिए उपयुक्त है या नहीं। भूमि की सेहत पर ही फसलों की सेहत निर्भर है। मिट्टी की जांच किसी भी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी या किसी प्राइवेट लैब में हो सकती है।
अच्छे बीज –
अच्छे बीज ही अच्छी खेती का आधार है, इसलिए बीजों को लेते समय उसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। अच्छे किस्म के बीजों को अधिक खाद, कीटनाशक, की जरूरत नहीं होता है।
समय पर बुवाई –
समय पर बुवाई होने से अच्छी उपज होती है। अगर समय पर बुवाई कार्य अच्छे से हो जाए तो लगभग आधी मेहनत वहीं सार्थक हो जाती है।
जैविक विकल्प –
आज के समय हर किसान छोटी से छोटी समस्या रासायनिक कीटनाशकों के द्वारा ठीक करना चाहता है वह एक बार भी जैविक विकल्पों की तरफ नहीं देखता। मेरे मुताबिक बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान जैविक तरीको से हो सकता है, इसमें किसान का ही भला है।
बाजार का ज्ञान-
हर किसान को मार्केट का ज्ञान होना चाहिए जैसे बाजार भाव, डिमांड और मौसमी प्रभाव आदि। बाजार के अनुसार क्वालिटी मेंटेनेंस भी जरूरी है, फसल साफ सुथरा एवं अच्छा हो तो मूल्य अच्छा प्राप्त होता है।
बगीचा –
हर किसान को अपने कुल जमीन के 5 प्रतिशत या 10 एकड़ में से एक एकड़ में बगीचा जरूर रखना चाहिए। जिससे अतिरिक्त आमदनी तथा पूरे साल भर अलग अलग फल प्राप्त हो सकते है। उन्होंने बताया कि उनके बगीचे में इस वर्ष दशहरी, आम्रपाली, लंगड़ा, बांम्बेग्रीन, चौसा, बैगनफल्ली, फंजली जैसे वेरायटी के आम बहुतायत हुए। उन्होंने अपने बगीचे में आम, चीकू, अमरूद, नींबू, जामुन, उन्नत किस्म के बेर लगाएं है। आत्मा योजना के तहत अंतरवर्ती फसल चना के साथ धनिया की फसल ले रहे हैं।
उन्होंने बताया कि नरवा, घुरवा, गरवा, बाड़ी योजना के तहत सामूहिक बाड़ी के लिए उद्यानिकी विभाग द्वारा प्रशिक्षण देकर भिंडी बीज उत्पादन कार्यक्रम से जोड़ा गया है ताकि आमदनी बढ़ सके। मल्चिंग विधि से भिंडी की खेती भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार हो गया है। संरक्षित खेती के तहत खेत में नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन के द्वारा शेडनेट निर्माण किया गया है। सब्सिडी में साल भर धनिया एवं अन्य सब्जी होती है।












































