
राजनांदगाँव, फास्ट ट्रैक कोर्ट, जिला न्यायालय राजनांदगांव के माननीय अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा द्वारा बलात्कार के एक मामले में सुनवाई उपरांत दिनांक 21 अक्टूबर 2022 को अपना फैसला सुनाते हुए आरोप साबित पाये जाने पर मानसिक रूप से निःशक्त महिला के बलात्कारी अभियुक्त जितेन्द्र उर्फ जीतू आ. स्व . हरीराम देवदास, उम्र 38 वर्ष, निवासी क्षेत्रान्तर्गत पुलिस चौकी ओपी चिखली, थाना कोतवाली, राजनांदगांव को भादसं की धारा 450 के तहत् 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000 रूपये के अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में 1 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास, भादसं की धारा 376 (2) (ठ) के तहत् आजीवन कारावास
(जिसका तात्पर्य उसके शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास होगा) एवं 1000 रूपये के अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में 1 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास तथा भादसं की धारा 506 भाग-दो के तहत् 1 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000 रूपये के अर्थदंड, अर्थदंड की राशि अदा न किये जाने की स्थिति में 1 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा से दंडित किये जाने का दंडादेश पारित किया गया। मामले में छत्तीसगढ़ राज्य की ओर आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव, अतिरिक्त लोक अभियोजक, फास्ट ट्रेक कोर्ट, राजनांदगाँव ने पैरवी की।
मामला यह है कि, दिनांक 7 जनवरी 2021 को पीड़िता के माता-पिता काम करने बाहर गये हुए थे । पीड़िता, जो मानसिक रूप से निःशक्त महिला है, अपने बुजुर्ग दादा के साथ घर पर अकेली थी, तभी सुबह 11 बजे के लगभग आरोपी जितेन्द्र उर्फ जीतू उसके घर आया और जबरदस्ती पीड़िता का हाथ बांह पकड़कर बलपूर्वक खींचते हुए कमरे में ले गया और उसके साथ बलात्कार किया तथा घटना की जानकारी किसी को देने पर जान से मारने की धमकी दिया और घटना को अंजाम देने के बाद अभियुक्त जितेन्द्र उर्फ जीतू वहां से भाग गया।
पीड़िता द्वारा घटना की पूरी जानकारी अपने घर वालों को दी गई तथा उनके साथ थाने में जाकर लिखित शिकायत प्रस्तुत की, जिसके आधार पर चौकी चिखली राजनांदगांव द्वारा अभियुक्त जितेन्द्र के विरूद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 376, 450 एवं 506 के तहत् एफआईआर दर्ज कर प्रकरण जांच में लिया गया । दौरान जांच के अभियुक्त जितेन्द्र को दिनांक 8 जनवरी 2021 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया तथा चौकी प्रभारी चेतन सिंह चंद्राकर द्वारा संपूर्ण विवेचना उपरान्त चालान सुनवाई हेतु न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था।









































